Defence Budget India: दुनिया एक बार फिर अस्थिरता के दौर से गुजर रही है. अलग-अलग महाद्वीपों में उभरते संघर्ष और सैन्य टकराव यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले साल वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो सकते हैं. ऐसे माहौल में भारत जैसे उभरते वैश्विक शक्ति के लिए अपनी रक्षा रणनीति और सैन्य तैयारियों की समीक्षा करना जरूरी हो गया है. इसी संदर्भ में बजट 2026 को लेकर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकार इस बार रक्षा खर्च में बड़ा इजाफा करेगी.
हाल के वर्षों में रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को झकझोर कर रख दिया है. यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके प्रभाव यूरोप से लेकर एशिया तक महसूस किए जा रहे हैं. वहीं अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता तनाव भी यह संकेत देता है कि सैन्य टकराव की संभावनाएं अब नए क्षेत्रों में उभर रही हैं. इन सबके बीच चीन और ताइवान को लेकर बनी अनिश्चित स्थिति दुनिया की बड़ी शक्तियों को चौकन्ना कर रही है. ऐसे हालात में लगभग हर देश अपने रक्षा बजट और सैन्य क्षमताओं पर नए सिरे से विचार कर रहा है.
भारत की रणनीति में चीन की केंद्रीय भूमिका
भारत के लिए सुरक्षा के मोर्चे पर सबसे बड़ी चुनौती चीन बनकर उभरा है. वास्तविक नियंत्रण रेखा और अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से जारी तनाव भारत की रक्षा नीति को सीधे प्रभावित करता है. चीन की बढ़ती सैन्य ताकत, तकनीकी उन्नयन और क्षेत्रीय विस्तारवादी सोच भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है. इसके साथ ही पाकिस्तान के साथ दो मोर्चों पर संभावित खतरा भारत को लगातार सतर्क रहने के लिए मजबूर करता है. इन्हीं कारणों से भारत अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है.
बजट 2026 में रक्षा खर्च बढ़ने की संभावना
पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए 6.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया था, जिसमें से लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये सैन्य आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित थे. जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए बजट 2026 में यह आवंटन और बढ़ाया जा सकता है. सरकार पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सेना को आधुनिक संसाधनों से लैस करने की प्रतिबद्धता जता चुकी है.
तकनीक और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत
भारत की रक्षा नीति अब केवल विदेशों से हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रही है. सरकार ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष आधारित रक्षा प्रणालियों जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर तेजी से फोकस कर रही है. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि देश अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर सके. नौसेना के विस्तार, समुद्री निगरानी और सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. इसका सीधा लाभ घरेलू रक्षा कंपनियों और निजी क्षेत्र को मिलने की संभावना है.
आने वाला बजट क्यों है अहम
इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए बजट 2026 केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक सोच का आईना साबित हो सकता है. यह बजट तय करेगा कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक तनावों और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना किस तरह से करेगा. रक्षा खर्च में संभावित बढ़ोतरी न सिर्फ सैन्य क्षमता को मजबूती देगी, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और सुरक्षित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हो सकती है.
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