भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर खुलकर अपनी निराशा जाहिर की है. अश्विन का मानना है कि इस बार टूर्नामेंट का रोमांच पहले जैसा नहीं रहेगा और इसकी सबसे बड़ी वजह आईसीसी की टूर्नामेंट प्लानिंग और ग्रुपिंग सिस्टम है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि इस तरह के मैचों को देखकर दर्शकों की दिलचस्पी कम हो जाएगी.
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से होने जा रही है. इस मेगा इवेंट में 20 टीमें हिस्सा लेंगी, जिन्हें 5 ग्रुप में बांटा गया है. भारतीय टीम ग्रुप A में है, जहां उसके साथ पाकिस्तान, अमेरिका, नामीबिया और नीदरलैंड्स जैसी टीमें शामिल हैं.
ऐसे मैचों से लोग टूर्नामेंट से कट जाएंगे – अश्विन
अश्विन ने टी20 वर्ल्ड कप की मौजूदा संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बार के मुकाबले दर्शकों को बांधकर रखने में नाकाम रहेंगे. उन्होंने कहा, "इस बार का टी20 वर्ल्ड कप शायद ही कोई देखना चाहे. भारत-अमेरिका या भारत-नामीबिया जैसे मुकाबले दर्शकों को टूर्नामेंट से दूर कर देंगे."
अश्विन ने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि जब वर्ल्ड कप चार साल में एक बार आता था, तब उसका अलग ही क्रेज हुआ करता था.
उन्होंने कहा कि 1996, 1999 और 2003 के वर्ल्ड कप के दौरान, जब वे स्कूल में थे, तो लोग पूरे शेड्यूल के कार्ड संभालकर रखते थे. हर मैच खास लगता था और हर मुकाबले का इंतजार किया जाता था. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं.
कमजोर टीमों के खिलाफ मुकाबलों से नहीं बनेगा रोमांच
अश्विन का साफ कहना है कि अगर टूर्नामेंट की शुरुआत में ही भारत का सामना अमेरिका या नामीबिया जैसी टीमों से होगा, तो दर्शकों में उत्साह नहीं बनेगा.
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि अगर पहले दौर में ही भारत की भिड़ंत इंग्लैंड, श्रीलंका या ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों से होती, तो टूर्नामेंट का रोमांच शुरू से ही चरम पर पहुंच जाता.
उनके मुताबिक, मौजूदा फॉर्मेट में सुपर-8 तक पहुंचते-पहुंचते टूर्नामेंट की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है, जिससे फैंस की दिलचस्पी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी.
ICC की रणनीति पर उठे सवाल
अश्विन की यह नाराजगी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे आईसीसी के उस मॉडल पर सवाल उठा रहे हैं जिसमें ज्यादा से ज्यादा टीमों को शामिल किया जा रहा है, लेकिन मैचों की प्रतिस्पर्धा का स्तर कमजोर हो रहा है.
उनका मानना है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में हर मुकाबला हाई-वोल्टेज होना चाहिए, ताकि दर्शक अंत तक जुड़े रहें. सिर्फ भागीदारी बढ़ाने से क्रिकेट का स्तर और रोमांच दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
वनडे क्रिकेट को लेकर भी जताई चिंता
टी20 वर्ल्ड कप के अलावा अश्विन ने वनडे क्रिकेट के भविष्य पर भी गंभीर चिंता जाहिर की. उनका मानना है कि 2027 वनडे वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मेट को लेकर आईसीसी को दोबारा सोचने की जरूरत पड़ेगी.
अश्विन के मुताबिक, ज्यादातर क्रिकेट फैंस अब टी20 की ओर शिफ्ट हो चुके हैं. टेस्ट क्रिकेट को लेकर भी एक खास वर्ग की दिलचस्पी बनी हुई है, लेकिन वनडे फॉर्मेट बीच में फंसता नजर आ रहा है.
उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे अपनी पहचान ही खो दे. यह फॉर्मेट न तो टी20 जितना तेज है और न ही टेस्ट क्रिकेट जितना परंपरागत, जिससे इसके अस्तित्व पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
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