बाड़मेर: राजस्थान के नवगठित बालोतरा जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि पूरी तरह से फिल्मी लगती है. यहां चार बीएड स्टूडेंट्स ने आखिरी सेमेस्टर की परीक्षा देने के लिए किसी रोड या बस की नहीं, बल्कि हेलिकॉप्टर की सवारी की. और ये फैसला महज स्टाइल दिखाने के लिए नहीं, बल्कि एक पूरे साल को बचाने के लिए लिया गया था.
जब बारिश और भूस्खलन ने रोक दी राह
इन चारों स्टूडेंट्स ओमाराम चौधरी (नेवरी), मगाराम चौधरी (सिणधरी), प्रकाश चौधरी (बांकियावास) और लकी चौधरी (गिड़ा) ने उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी से बीएड कर रहे हैं. वे जोधपुर से ट्रेन पकड़कर हल्द्वानी तो पहुंच गए, लेकिन आगे का सफर मुनस्यारी (आरएस टोलिया पीजी कॉलेज) तक तय करना नामुमकिन हो गया. भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण सभी सड़कें बंद हो चुकी थीं, और परीक्षा का दिन पास आता जा रहा था.
हेलिकॉप्टर बना उम्मीद की उड़ान
उम्मीद की एक किरण तब नजर आई जब छात्रों ने हेरिटेज एविएशन कंपनी के सीईओ से संपर्क किया. स्थिति को समझते हुए उन्होंने एक हेलिकॉप्टर और दो पायलट्स की व्यवस्था करवाई.
करीब 300 किमी की दूरी, जिसे तय करने में सड़क मार्ग से 10 घंटे लगते. वहीं हेलिकॉप्टर ने सिर्फ 40 मिनट में तय कर दी. छात्र समय पर एग्जाम सेंटर पहुंचे और परीक्षा दी.
कितना खर्च आया?
इस साहसिक कदम की एक कीमत भी थी. प्रत्येक छात्र ने एकतरफा किराए के रूप में ₹5200 चुकाए, यानी आने-जाने का कुल खर्च ₹10,400 प्रति छात्र. हालांकि, छात्रों के मुताबिक जब पूरा साल दांव पर लगा हो, तो ये रकम बड़ी नहीं लगती.
“साल बच गया, यही सबसे बड़ी जीत है”
स्टूडेंट ओमाराम चौधरी ने बताया, “एक पल को लगा कि साल खराब हो जाएगा. मन टूट चुका था. लेकिन हेलिकॉप्टर सेवा ने हमें समय पर पहुंचा दिया. अब राहत है कि आखिरी सेमेस्टर की परीक्षा हो गई.” गौरतलब है कि सभी छात्र पहले से ही ग्रेड थर्ड टीचर के तौर पर सरकारी नौकरी कर रहे हैं और अपनी शैक्षणिक योग्यता को और बेहतर करने के लिए बीएड कर रहे हैं.
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