कतर से सेकेंड हैंड फाइटर जेट क्यों खरीदना चाहता है भारत? तुर्किए ने भी गड़ाई नजर; क्या है प्लान?

पश्चिम एशियाई देश कतर की वायुसेना से जुड़े पुराने लेकिन एडवांस्ड लड़ाकू विमान अचानक से वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन विमानों की मांग दो ऐसे देशों से आ रही है जिनके आपसी रिश्ते कुछ खास मधुर नहीं कहे जा सकते — भारत और तुर्किए.

Qatar second hand fighter jets turkey wants to buy
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पश्चिम एशियाई देश कतर की वायुसेना से जुड़े पुराने लेकिन एडवांस्ड लड़ाकू विमान अचानक से वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन विमानों की मांग दो ऐसे देशों से आ रही है जिनके आपसी रिश्ते कुछ खास मधुर नहीं कहे जा सकते — भारत और तुर्किए.

जहां भारत कतर के मिराज-2000 जेट्स को खरीदने की कोशिश में है, वहीं तुर्किए की नजर यूरोफाइटर टाइफून जेट्स पर है. दोनों देश कतर से सेकेंड हैंड जेट्स की डील करने को लेकर गंभीर बातचीत कर रहे हैं.

तुर्किए क्यों चाहता है कतर के यूरोफाइटर टाइफून?

तुर्किए की वायुसेना इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है. उसका पारंपरिक F-16 फ्लीट अब पुराना हो चुका है और अमेरिका के F-35 प्रोग्राम से बाहर किए जाने के बाद उसकी जरूरतें और भी बढ़ गई हैं. ऐसे में कतर के पास मौजूद ट्रैंच 3A यूरोफाइटर टाइफून जेट्स उसके लिए तुरंत इस्तेमाल के लायक विकल्प बनकर सामने आए हैं. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्किए इन टाइफून जेट्स की 10 से 15 यूनिट्स खरीदने पर विचार कर रहा है. हाल ही में तुर्किए के रक्षा मंत्री यासर गुलर और वायुसेना प्रमुख जनरल जिया सेमल कादिओग्लू ने दोहा का दौरा भी किया, जिसे इस संभावित डील की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. कतर के पास फिलहाल 24 यूरोफाइटर टाइफून ट्रैंच 3A जेट हैं और उसने 12 नए ट्रैंच 4 वर्जन के टाइफून का ऑर्डर भी दे रखा है. इसके अलावा उसके पास F-15QA और राफेल जैसे आधुनिक विमान पहले से ही सेवा में हैं.

भारत की नजर मिराज-2000 जेट्स पर, क्यों है यह डील जरूरी?

भारतीय वायुसेना साल 2023 से कतर से 12 सेकेंड-हैंड मिराज 2000 जेट्स की खरीद पर बातचीत कर रही है. इनमें 9 सिंगल-सीटर मिराज-2000-5EDA और 3 ट्विन-सीटर मिराज-2000-5DDA वर्जन शामिल हैं. ये विमान 1990 के दशक में कतर को मिले थे, लेकिन उनका उपयोग बेहद सीमित रहा है, जिससे उनकी हालत काफी अच्छी मानी जा रही है. 

भारत पहले से ही मिराज-2000 जेट्स का इस्तेमाल करता आया है. 1985 से सेवा में ये विमान अब भी भारतीय वायुसेना की रणनीतिक रीढ़ हैं. इनका इस्तेमाल बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसे ऑपरेशन में किया जा चुका है, जिससे इनकी ताकत और भरोसेमंद प्रदर्शन साबित हुआ है. अगर भारत कतर से 12 नए मिराज हासिल कर लेता है, तो कुल संख्या 60 के करीब पहुंच जाएगी इससे न केवल मिराज बेड़े की ताकत बढ़ेगी, बल्कि उनके रखरखाव और पुर्जों की उपलब्धता भी आसान हो जाएगी. हालांकि कीमत को लेकर कुछ मतभेद हैं. कतर की ओर से इन जेट्स की कीमत करीब ₹5000 करोड़ (लगभग $600 मिलियन) बताई गई है, जबकि भारत इस सौदे को कम लागत पर फाइनल करना चाहता है.

भारत और तुर्किए के रिश्तों के बीच इस सौदे का क्या मतलब है?

दिलचस्प बात ये है कि भारत और तुर्किए के कूटनीतिक संबंध बीते कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रहे हैं. तुर्किए अक्सर पाकिस्तान का खुला समर्थन करता है और कश्मीर मुद्दे पर भारत-विरोधी बयान देता आया है. वहीं भारत ने ग्रीस, आर्मेनिया और साइप्रस जैसे तुर्किए-विरोधी देशों के साथ अपने सैन्य और रणनीतिक रिश्ते मजबूत किए हैं. इसके बावजूद, दोनों देश कतर से हथियार खरीद में दिलचस्पी दिखा रहे हैं — जो दर्शाता है कि भू-राजनीति और सैन्य जरूरतें अक्सर एक-दूसरे से अलग दिशा में चलती हैं.

कतर और तुर्किए की करीबी का फायदा?

तुर्किए और कतर के बीच पिछले एक दशक में मजबूत सैन्य और आर्थिक संबंध बने हैं. कतर के तारकिया क्षेत्र में तुर्किए का एक स्थायी सैन्य अड्डा भी है, जहां लगभग 3,000 तुर्की सैनिक तैनात हैं. इसके अलावा, कतर तुर्किए से ड्रोन और बख्तरबंद वाहन भी खरीदता रहा है. रक्षा उत्पादन में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे यूरोफाइटर टाइफून की डील के लिए माहौल अनुकूल बना है.

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