नई दिल्ली/इस्लामाबाद: अफगानिस्तान और भारत के बीच हाल ही में जारी एक संयुक्त बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की कूटनीतिक राजनीति को गर्म कर दिया है. इस बयान में स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया गया है. एक ऐसी बात जो पाकिस्तान को बेहद नागवार गुज़री है. यह बयान उस समय आया है जब तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत की यात्रा पर आए हुए हैं और उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से द्विपक्षीय वार्ता की.
संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर की स्थिति स्पष्ट
भारत और अफगानिस्तान द्वारा जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की. बयान में इस घटना को “भारत के जम्मू-कश्मीर” में हुआ हमला बताया गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत गया कि तालिबान नेतृत्व वाली अफगान सरकार जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा मानती है.
यह पहली बार नहीं है जब अफगानिस्तान की ओर से ऐसी स्वीकार्यता देखने को मिली हो, लेकिन तालिबान शासन में यह रुख एक नई और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है.
पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया
तालिबान के इस रुख से पाकिस्तान में खलबली मच गई. इस्लामाबाद में स्थित अफगान दूतावास को तुरंत तलब किया गया और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की स्थिति विवादित है. अफगानिस्तान द्वारा इसे भारत का हिस्सा मानना न केवल इन प्रस्तावों का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्रीय संवेदनशीलता को भी प्रभावित करता है."
इसके साथ ही पाकिस्तान ने अफगान प्रतिनिधियों को यह भी याद दिलाया कि कश्मीर पर पाकिस्तान का दावा केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों द्वारा समर्थित है, हालांकि यह बात भारत और अधिकतर अंतरराष्ट्रीय साझेदारों द्वारा खारिज की जा चुकी है.
मुत्तकी के बयान से पाकिस्तान असहज
जम्मू-कश्मीर मुद्दे के अलावा, तालिबानी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी द्वारा दिया गया एक और बयान पाकिस्तान को रास नहीं आया. मुत्तकी ने भारत में अपने वक्तव्य में कहा, "आतंकवाद पाकिस्तान की आंतरिक समस्या है, जिसकी जड़ें उनकी घरेलू राजनीति और नीतियों में हैं."
यह बयान पाकिस्तान को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा करता है. इस पर पाकिस्तान ने तीव्र आपत्ति जताते हुए कहा, "हम अफगान सरकार को लगातार सबूतों के साथ यह दिखा चुके हैं कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और नागरिकों पर होने वाले हमलों के पीछे TTP (Tehrik-i-Taliban Pakistan) जैसे आतंकी संगठनों का हाथ है, जो अफगान सरज़मीं से काम कर रहे हैं."
पाकिस्तान ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान इस मुद्दे से मुंह नहीं मोड़ सकता और उसे अपने क्षेत्र से संचालित हो रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.
भारत-अफगान रिश्तों में नई गर्मजोशी
विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान शासन के वरिष्ठ प्रतिनिधि का भारत दौरा पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से झटका है. पाकिस्तान लंबे समय तक तालिबान के करीब रहा है और उसकी सत्ता में वापसी को इस्लामाबाद ने रणनीतिक जीत माना था. लेकिन अफगान विदेश मंत्री का भारत दौरा और उसके बाद जारी हुए बयानों ने इस समीकरण को उल्टा कर दिया है.
भारत और अफगानिस्तान के बीच हुए संवाद में:
इन सभी बातों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत, अफगानिस्तान के साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है, भले ही काबुल में किसकी सरकार हो.
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