हाल ही में रूस ने एक बार फिर दुनिया को अपने सैन्य पराक्रम का परिचय दिया है. खासकर नाटो (NATO) के साथ बढ़ते तनाव और पोलैंड की सीमा पर स्थितियों के गरमाने के बीच यह शक्ति प्रदर्शन वैश्विक कूटनीति में नए समीकरणों को जन्म दे रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अगुवाई में रूस ने ऐसे समय पर अपनी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक और परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है, जब पश्चिमी देशों से तनातनी अपने चरम पर पहुंच चुकी है. यह कदम न केवल रूस की सैन्य रणनीति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वह किसी भी तरह के विदेशी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है.
सैन्य समझौते की कोई गुंजाइश नहीं
इस हालिया शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से क्रेमलिन ने दो प्रमुख संदेश देने की कोशिश की है. पहला, रूस अपने रक्षा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कटौती या समझौते के पक्ष में नहीं है. दूसरा, अगर पश्चिमी देशों विशेषकर नाटो दबाव बढ़ाने की कोशिश करेंगे, तो रूस की प्रतिक्रिया और भी कड़ी होगी. यह संदेश केवल नाटो तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वैश्विक संतुलन की दिशा किस ओर मुड़ सकती है.
बारेंट्स सागर में मिसाइल परीक्षण
रूस और बेलारूस की संयुक्त सैन्य अभ्यास "जापाद" के दौरान, रूस की नौसेना ने Tsirkon (जिरकॉन) नामक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया. यह परीक्षण बारेंट्स सागर में किया गया, जहां मिसाइल को एक विशेष टारगेट पर दागा गया और उसने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर दिया. यह मिसाइल 9 मैक यानी ध्वनि की गति से 9 गुना तेज उड़ने में सक्षम है. यही वजह है कि इसे रूस के "अल्टीमेट वेपन" की श्रेणी में रखा गया है.
Tsirkon न केवल समुद्री लक्ष्यों को भेद सकती है, बल्कि यह ज़मीन पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को भी सटीकता से नष्ट करने की क्षमता रखती है. इसकी मारक दूरी करीब 1000 किलोमीटर तक हो सकती है, और इतनी तेज़ गति की वजह से इसे रोक पाना मौजूदा किसी भी मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए बेहद मुश्किल है.
सुपरसोनिक विमानों और नौसेना की तैयारी
सिर्फ मिसाइल परीक्षण ही नहीं, इस ड्रिल में सुखोई Su-34 जैसे अत्याधुनिक सुपरसोनिक फाइटर-बॉम्बर्स ने भी हिस्सा लिया. इन विमानों ने ज़मीनी लक्ष्यों पर हमले का अभ्यास किया. इसके अलावा, रूस की नौसेना के लंबी दूरी तक उड़ने वाले एंटी-सबमरीन एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास में सक्रिय थे. इससे साफ है कि रूस हर मोर्चे चाहे वह हवा हो, ज़मीन हो या समुद्र पर मुकाबले की पूरी तैयारी कर चुका है.
रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो में देखा गया कि एडमिरल गोलोव्को फ्रिगेट से जिरकॉन मिसाइल को बड़े नाटकीय अंदाज में दागा गया. जैसे ही मिसाइल ने हवा में उड़ान भरी, उसकी गति और दिशा इस बात का संकेत दे रही थी कि रूस इस हथियार को केवल "दिखावे" के लिए नहीं, बल्कि एक सक्रिय रणनीतिक उपकरण के रूप में विकसित कर रहा है.
रूस का दावा: डिफेंसिव लेकिन तैयार
मॉस्को और मिन्स्क दोनों ने संयुक्त बयान जारी कर यह स्पष्ट किया कि यह सैन्य अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और किसी नाटो देश पर हमला करने का इरादा नहीं है. हालांकि, नाटो ने इसे हल्के में नहीं लिया और तुरंत "ईस्टर्न सेंट्री ऑपरेशन" नाम से अपनी जवाबी सैन्य तैनाती शुरू कर दी. यह कदम खासकर तब उठाया गया, जब हाल ही में रूसी ड्रोन कथित रूप से पोलैंड की सीमा में देखे गए थे. इन हालातों में यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्ष बेहद संवेदनशील स्थिति में खड़े हैं और किसी भी गलतफहमी से बड़ा टकराव हो सकता है.
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