किताब खरीद को लेकर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगेगी रोक, NHRC ने राज्यों से मांगा जवाब! जानें पूरा मामला

Private School NCERT Books Rules: अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगने वाली है, खासकर हर साल महंगी किताबें खरीदने के दबाव पर. मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि स्कूल चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, बच्चों के साथ अकादमिक भेदभाव नहीं सहा जाएगा.

Private schools arbitrary book purchases will be stopped the NHRC has issued a deadline to states
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Private School NCERT Books Rules: अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगने वाली है, खासकर हर साल महंगी किताबें खरीदने के दबाव पर. मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि स्कूल चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, बच्चों के साथ अकादमिक भेदभाव नहीं सहा जाएगा. 

प्रियंका कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने देशभर से मिली शिकायतों के बाद सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी किया है, जिसमें 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है. यह कार्रवाई 'नमो फाउंडेशन' द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर की गई है.

महंगी किताबों से मिलेगी राहत

अक्सर देखा जाता है कि प्राइवेट स्कूल जानबूझकर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें रखते हैं, जो NCERT की किताबों से 10 गुना तक महंगी होती हैं. अब आयोग ने आदेश दिया है कि कक्षा 8 तक केवल NCERT/SCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएं. इसका मतलब है कि अब बच्चों को किताबों के नाम पर हजारों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे. आयोग ने शिक्षा मंत्रालय से यह भी पूछा है कि कक्षा 8 तक का सिलेबस सरकारी मानकों से अलग क्यों है?

बच्चों का वजन होगा कम

आयोग ने 'नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020' को सख्ती से लागू करने का भी आदेश दिया है. इसका मतलब यह है कि बच्चों के स्कूल बैग का वजन अब कम होगा. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) की धारा 29 का हवाला देते हुए आयोग ने साफ कहा है कि ज्यादा किताबें और भारी बोझ लादने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

स्कूलों की मनमर्जी की 'बुकलिस्ट' पर रोक

अब स्कूल अपनी मर्जी से कोई भी किताब नहीं लगा पाएंगे. प्रशासन 30 दिनों के भीतर हर स्कूल का ऑडिट करेगा. अगर किसी स्कूल में NCERT के अलावा कोई दूसरी किताबें मिलीं, तो स्कूल को जवाब देना होगा.

आयोग ने राज्यों से क्या पूछा है?

आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस भेजकर तीन महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं:

  1. क्या आपके जिले के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों को NCERT किताबें पढ़ाने का आदेश दिया है?
  2. अगर नहीं दिया है, तो तुरंत आदेश जारी करें और स्कूलों की लिस्ट चेक करें.
  3. 2025-26 सत्र में कितने बच्चों ने प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है और उनके लिए कितनी किताबें खरीदी गई हैं?

आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि जब सरकारी स्कूलों में NCERT की किताबें चल रही हैं, तो प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबें पढ़ाना एक तरह का भेदभाव है. शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पाठ्यक्रम एक जैसा होना चाहिए. अगले 30 दिनों के भीतर सभी राज्य सरकारों को अपनी रिपोर्ट आयोग को भेजनी होगी.

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