नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान होने जा रहा है, लेकिन इस महत्वपूर्ण दिन से पहले ही सियासी हलचल तेज हो गई है. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी की जीत का दावा कर रही हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लोकतंत्र के लिए खतरे की बात कहते हुए कड़ी फटकार लगाई है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में मतदान से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य बनाम केंद्र का विवाद नहीं है, बल्कि एक ऐसा मामला है जहां एक व्यक्ति, जो मुख्यमंत्री हैं, जांच के बीच में हस्तक्षेप कर लोकतंत्र को खतरे में डाल रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इस देश में ऐसा दिन भी आएगा जब कोई मुख्यमंत्री जांच के बीच में इस तरह दखल देगा. कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे सिस्टम को खतरे में डाल दिया है.
ED का तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर शिकंजा
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज कर चुका है. ED ने टीएमसी के दो बड़े उम्मीदवारों, सुजीत बोस और रथिन घोष, को 24 अप्रैल को पेश होने के लिए चौथा समन जारी किया है. ये दोनों उम्मीदवार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अपनी-अपनी सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, और ED की कार्रवाई से चुनावी माहौल और भी गरम हो गया है. सुजीत बोस बिधाननगर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं, जबकि रथिन घोष मध्यमग्राम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
चुनाव के पहले चरण की तैयारियां
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए 294 सीटों पर मतदान दो चरणों में होगा. पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल को होगा, जबकि दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को निर्धारित किया गया है. पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी. चुनावी नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, और इस चुनावी रण में तृणमूल कांग्रेस की जीत या हार की दिशा तय करने में इन दोनों चरणों के चुनावों का अहम योगदान होगा.
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