गाजीपुर, भारत 24 डिजिटल डेस्क: सर्वोच्च्य न्यायालय के आदेश के बाद गाजीपुर से बसपा सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) की संसद सदस्यता बहाल करने की अधिसूचना लोकसभा स्पीकर के द्वारा जारी कर दी गयी है.. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में अफजाल अंसारी को कुछ शर्तों के साथ उनकी संसद सदस्यता की बहाली का आदेश दिया था और लोकसभा के स्पीकर द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अफजाल अंसारी की संसद की डिबेट में भाग लेकर मतदान नहीं कर सकते हैं. इस अधिसूचना के बाद अब अफजाल अंसारी के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है और अब चुनावी मोड में भी आ गये हैं.
क्या है पूरा मामला?
बता दें अफजाल अंसारी को गैंगेस्टर के एक मामले में गाजीपुर की MP-MLA कोर्ट से 4 साल की सजा हुई थी और उनको जेल भेज दिया गया था और उनकी संसद सदस्यता रद्द हो गयी थी. संसद सदस्यता बहाल होने के बाद आज मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि '2019 के बाद एक दिन भी सरकार ने चैन की रोटी खाने नहीं दी. जनता का अभूतपूर्व समर्थन और ऊपर वाले की कृपा है कि मैं जीवित हूं. मेरी जगह कोई दूसरा होता तो हतोत्साहित होकर प्राण त्याग देता. मैं दूसरी मिट्टी का बना हूं अत्याचार और जुल्म के बल पर मुझे हराया नहीं जा सकता.'
चुनाव लड़ने को लेकर बोले अंसारी
चुनाव लड़ने को लेकर अफजाल अंसारी ने कहा- 'अब मैं चुनाव लड़ने के योग्य हो चुका हूं और चुनाव लड़ने की इच्छा भी है. मैं 10 चुनाव लड़ चुका हूं. समाजवादी पार्टी से 2004 में और 2019 में सपा-बसपा गठबंधन से चुनाव लड़ चुका हूं. अब कौन लड़ने आयेगा. अगर आमने-सामने मनोज सिन्हा से लड़ाई हुई तो वो गणना कराने नहीं आयेंगे. 2019 के बाद चुनाव के बाद जो घटनाक्रम है जनता सब देख रही है. मैं षड्यंत्र किया गया हूं. मेरे पैरों में बेड़ियां डाल दी गईं. मेरा हौसला तोड़ने के लिये हर तरह से बर्बाद किया गया. मेरी खड़ी फसलों को बर्बाद किया गया. परिवार के सदस्यों को झूठे मुकदमे में फसाया गया.'
'मैं चुनाव लड़ने के योग्य हूं'
मेरे 4 साल की सजा का फैसला एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था पर वो अंतिम सत्य नहीं था. सजा हुई मैं जेल गया और लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया. जब हम अपील में गये तो उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात सुनकर मुझे जमानत दी लेकिन सजा निलंबित नहीं की. उसकी अपील मैंने सर्वोच्च न्यायालय में की. सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ सजा के आदेश को निलंबित किया. 11 जनवरी को लोकसभा के स्पीकर ने अधिसूचना जारी करके अब मेरी संसद सदस्यता सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार शर्तों के साथ बहाल कर दी है और अब मैं चुनाव लड़ने के योग्य हूं पर शर्तों के अनुसार मैं सदन की डिबेट में शमिल होकर मतदान नहीं कर सकता.'