Pakistan News: पाकिस्तान में बढ़ती राजनीतिक हलचल के बीच राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपना यूरोप दौरा अचानक छोटा कर दिया है. यूरोप यात्रा के दौरान वियना और ऑस्ट्रिया में निजी कार्यक्रमों के बाद वह 1 सितंबर को लंदन पहुंचे थे. इसके बाद उन्हें दो दिनों के लिए फ्रांस जाना था, लेकिन इस्लामाबाद से आई खबरों के बाद उनका यह दौरा रद्द कर दिया गया. अब जरदारी 8 सितंबर को सीधे पाकिस्तान लौटेंगे.
पाकिस्तान को कई प्रांतों में बांटने की चर्चा
दरअसल, पाकिस्तान में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नए विवाद ने जन्म लिया है. योजना मंत्री अहसान इकबाल ने देश में नए प्रांत बनाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने पाकिस्तान को मौजूदा व्यवस्था के बजाय 12 से 15 प्रांतों में बांटने की बात कही है.
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानी पीपीपी में बेचैनी बढ़ गई है. पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता उसका मजबूत गढ़ सिंध है. पीपीपी ने साफ कहा है कि संविधान के मुताबिक प्रक्रिया, जनता की सहमति और सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति के बिना सिंध में किसी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा.
इस राजनीतिक संकट के बीच जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो और बेटी बख्तावर भुट्टो भी लंदन पहुंच गए. बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर हुई बैठकों में सिंध में जनसमर्थन कमजोर होने और वहां सेना का प्रभाव बढ़ने को लेकर चिंता जताई गई. हालांकि, बिलावल और बख्तावर ने फिलहाल करीब एक सप्ताह और लंदन में रुकने का फैसला किया है.
मोहसिन नकवी से भी हुई जरदारी की मुलाकात
इससे पहले लंदन में जरदारी की पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से मुलाकात हुई थी. नकवी को सेना प्रमुख आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है. पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने की चर्चा के पीछे सेना की भूमिका होने के कयास भी लगाए जा रहे हैं.
जरदारी और नकवी की मुलाकात में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और मौजूदा राजनीतिक हालात पर बातचीत होने की बात सामने आई है. इसके बाद जरदारी के जल्द पाकिस्तान लौटने की चर्चा तेज हो गई.
अब 8 सितंबर पर नजर
राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से फ्रांस दौरा रद्द करने की कोई स्पष्ट आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है. हालांकि, पाकिस्तान में प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की चर्चा, सिंध को लेकर पीपीपी की चिंता और सेना के बढ़ते प्रभाव की अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है.
अब सबकी नजर 8 सितंबर पर है, जब आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान लौटेंगे. उनके सामने देश के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल और सिंध को लेकर बढ़ते विवाद से निपटने की बड़ी चुनौती होगी.
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