Political Popcorn: 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का नया सिग्नल, सुधारों की पटरी पर सत्ता पक्ष की रफ्तार!

विश्व पटल पर देश की मजबूत विकास दर और 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की चर्चा के बीच सत्ता के गलियारों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

Political popcorn The ruling party New Signal for Reform Express
Bharat 24

1. रिफॉर्म एक्सप्रेस' का नया सिग्नल!

सुधारों की पटरी पर सत्ता पक्ष की रफ्तार!

विश्व पटल पर देश की मजबूत विकास दर और 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की चर्चा के बीच सत्ता के गलियारों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। सचमुच जब शीर्ष नेतृत्व ने उत्पादन और व्यापार में भरोसे की बात दोहराई तो नीति-निर्माताओं के चेहरे खिल उठे। अलबत्ता विपक्ष का कहना है कि कागजी सुधारों और जमीनी स्तर के बीच तालमेल बिठाना अब भी एक चुनौती बना हुआ है। राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि सरकार का यह 'ट्रस्ट मॉडल' अर्थव्यवस्था को नई गति देने की ठोस कोशिश है, लेकिन आम आदमी की जेब तक इसका सीधा असर कब और कितना पहुंचेगा, यही सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है।

2. दो छंद बनाम छह छंद का राष्ट्रीय राग!

वंदे मातरम पर 10 सूत्रीय प्रस्ताव और देशव्यापी संग्राम!

भाजपा ने कांग्रेस के उस रुख पर कड़ा एतराज जताते हुए 10-सूत्रीय प्रस्ताव पास किया जिसमें वंदे मातरम के सिर्फ शुरुआती दो छंद गाने की बात कही गई थी, सचमुच 150वीं वर्षगांठ के मौके पर राष्ट्रगीत को लेकर दोनों खेमों में देशभक्ति बनाम सुविधा की तीखी जंग छिड़ चुकी है। अलबत्ता सत्ता पक्ष इसे पूर्ण राष्ट्रवाद का संकल्प बता रहा है तो विपक्ष इसे पुराने ऐतिहासिक संदर्भों की दुहाई देकर संतुलित करने में जुटा है। राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि यह सांस्कृतिक दांव चुनावी बिसात पर सीधा असर डालेगा, लेकिन असल भावनात्मक जुड़ाव जनता तक कैसे पहुंचेगा, यही सबसे बड़ा प्रश्न है।

3. छात्रों की गूंज और इंफ्लुएंसर की पूंजी!

पुणे के युवा संवाद पर 'पैसे की गूंज' का तंज!

पुणे में विपक्ष के छात्र संवाद कार्यक्रम के बीच सत्ता पक्ष ने यह आरोप लगाते हुए नया सियासी शिगूफा छोड़ दिया कि भीड़ जुटाने के लिए इंफ्लुएंसर्स को सहारा बनाया गया। सचमुच सोशल मीडिया के इस दौर में डिजिटल चेहरों के जरिए युवाओं को रिझाना सभी दलों की आधुनिक जरूरत बन चुका है। अलबत्ता, विपक्षी रणनीतिकार इसे युवाओं के स्वतःस्फूर्त जुड़ाव से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं। राजनीतिक प्रेक्षक देख रहे हैं कि डिजिटल युद्धभूमि में वोटरों के दिल तक पहुंचने की यह होड़ किस करवट बैठेगी।

4. चवन्नी की तलाश में रुपैया हुआ बेगाना!

मेरठ से 'हैंडपंप' की ओर खिंचती साइकिल की चेन!

पश्चिम उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में समाजवादी पार्टी और रालोद के बीच गठबंधन का धागा अब पूरी तरह खिंचता नजर आ रहा है। सचमुच जब मेरठ के मौजूदा सपा विधायक ने चुपके से जयंत चौधरी के द्वार पर दस्तक दी तो 'पीडीए' के दावों की हवा निकल गई। अलबत्ता कभी 'चवन्नी से रुपैया' का तंज कसने वाले सिपहसालार अब खुद अपने ही नेताओं का मोहभंग नहीं रोक पा रहे हैं। राजनीतिक प्रेक्षक इसे केवल टिकट का जुगाड़ नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में प्रभाव खोती विपक्षी रणनीति का नतीजा मान रहे हैं। अब देखना यह है कि बगावत की यह उल्टी गंगा गठबंधन के कुनबे को कितना बहा ले जाती है, जो विपक्षी खेमे के लिए बड़ा प्रश्न है ?

​5. 25 हजारी टिकट और दरबारी हाजिरी!

मुंबई छोड़ दिल्ली दौड़े शायर..साहब की नजर, बाकी सब बेअसर!

कांग्रेस के गलियारों में वफादारी साबित करने की होड़ किस कदर हावी है, इसका ताजा नमूना तब दिखा जब राहुल गांधी के थाने पहुंचते ही इमरान प्रतापगढ़ी ने 25 हजार की तत्काल फ्लाइट पकड़ी। सचमुच मुंबई और पुणे के अहम संगठनात्मक कार्यक्रमों को बीच में ही छोड़कर दिल्ली की दर्शक दीर्घा में सिर्फ 'नारेबाजी वाला चेहरा' दिखाने पहुंचना दरबारी सियासत की पराकाष्ठा है। अलबत्ता रात में दिल्ली में उपस्थिति दर्ज कराकर सुबह फिर पुणे भागने की इस हड़बड़ी पर पार्टी के भीतर ही दबी जुबान में ठहाके गूंज रहे हैं। राजनीतिक प्रेक्षक तंज कस रहे हैं कि जब जमीन पर काम करने के बजाय आलाकमान की नजरों में आने की ही प्राथमिकता हो, तो संगठन की चुनावी नैया कैसे पार लगेगी, यही सबसे गंभीर प्रश्न बना हुआ है!