न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशनियान ने अपने देश की नई कूटनीतिक सफलता का ऐलान किया है. उन्होंने इस मंच से बताया कि आर्मेनिया ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंध स्थापित कर अपने विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इसके अलावा, उन्होंने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच हाल ही में हुई शांति प्रक्रिया की भी जानकारी दी, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता को महत्वपूर्ण बताया गया.
पाशनियान ने कहा कि स्वतंत्रता मिलने के बाद करीब 30 वर्षों तक आर्मेनिया के सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं थे. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और दोनों देशों ने अगस्त के अंत में एक-दूसरे के साथ राजनयिक रिश्ते शुरू किए हैं. उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब संवाद की नई राहें खुल गई हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता में मदद मिलेगी.
आर्मेनिया-अजरबैजान शांति समझौता
प्रधानमंत्री ने बताया कि 8 अगस्त को वॉशिंगटन में आर्मेनिया और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिनके गवाह डोनाल्ड ट्रंप और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव थे. पाशनियान ने इस शांति प्रक्रिया में ट्रंप की भूमिका को निर्णायक बताया और कहा कि दोनों नेता ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने पर सहमत हुए हैं.
भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ती दोस्ती
पाशनियान ने अपने संबोधन में भारत के साथ आर्मेनिया के बढ़ते संबंधों पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत और आर्मेनिया ने रक्षा सहयोग को मजबूत किया है और दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी बढ़ रही है. आर्मेनिया ने भारत से पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, आकाश मिसाइल और हॉवित्जर गन जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियां हासिल की हैं. इसके अलावा, उन्होंने यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए संसद द्वारा शुरू की गई आवेदन प्रक्रिया का भी उल्लेख किया.
व्यापक कूटनीतिक दृष्टिकोण
पाशनियान ने बताया कि आर्मेनिया ने अपने विदेश संबंधों को व्यापक रूप दिया है, जिसमें भारत, यूरोपीय संघ, अमेरिका, रूस, चीन और क्षेत्रीय पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है. उनका मानना है कि राजनयिक रिश्तों का यह विस्तार देश की स्थिरता और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इस प्रकार, आर्मेनिया ने क्षेत्रीय तनावों को कम करते हुए नए राजनयिक रिश्ते कायम किए हैं और वैश्विक मंच पर अपनी विदेश नीति को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है. प्रधानमंत्री पाशनियान के इस संबोधन ने नए द्विपक्षीय संबंधों और शांति प्रयासों की दिशा में एक सकारात्मक संदेश दिया है.
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