Dhwajarohan in Ayodhya: अयोध्या इन दिनों भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है. विवाह पंचमी के पावन अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पहली बार भगवा धर्म ध्वजा फहराने का ऐतिहासिक समारोह होने जा रहा है. पूरा शहर मानो दीपोत्सव की भांति जगमगा रहा है.सड़कों पर राम नाम के जयकारे गूंज रहे हैं और देश-विदेश से आए रामभक्त नृत्य-कीर्तन करते भगवान राम की नगरी में पहुंच रहे हैं. इस भव्य आयोजन की मुख्य कड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे, जो मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराकर इतिहास का स्वर्णिम अध्याय जोड़ेंगे.
अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया है. मंदिर का शिखर रंग-बिरंगी रोशनी से ऐसा चमक रहा है मानो स्वयं देवता धरा पर उतर आए हों. आज का ध्वजारोहण सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राम राज्य की मर्यादा, शक्ति और गौरव का प्रतीक बनकर उभरेगा. इस ध्वज में बना तेजस्वी सूर्य, कोविदारा वृक्ष और ‘ॐ’ का अंकन भगवान श्रीराम की वीरता, ज्ञान और आदर्श राज्य व्यवस्था का संदेश देता है. यह आयोजन विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त में होगा, जो भगवान राम और मां सीता के दिव्य मिलन की स्मृति को पुनर्जीवित करता है.
प्रधानमंत्री का विशेष दौरा: सप्तमंदिर से राम लला तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह से ही अयोध्या में कई पवित्र स्थलों के दर्शन करेंगे. कार्यक्रम के अनुसार वे सबसे पहले सप्तमंदिर जाएंगे, जहां महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, माता अहिल्या, निषादराज गुह और माता शबरी के मंदिर स्थित हैं. यह भ्रमण अयोध्या की आध्यात्मिक परंपरा और ऋषि संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है.
इसके बाद प्रधानमंत्री शेषावतार मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन करेंगे. दोपहर में वे राम दरबार और रामलला गर्भगृह में पूजा-अर्चना करेंगे. ठीक 12 बजे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया जाएगा. यह क्षण न केवल मंदिर निर्माण के पूर्णत्व का संकेत होगा, बल्कि भारतीय संस्कृति की एकता और आध्यात्मिक जागरण का वैश्विक संदेश भी देगा. इस ऐतिहासिक पल के बाद प्रधानमंत्री विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे.
विवाह पंचमी का आध्यात्मिक महत्व
यह आयोजन मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को हो रहा है, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है. यह दिन श्री राम और माता सीता के दिव्य विवाह का साक्षी माना जाता है. आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस भी इसी तिथि पर पड़ता है. कहा जाता है कि उन्होंने 17वीं सदी में अयोध्या में 48 घंटे ध्यान साधना की थी, जिससे यह दिन और भी पवित्र माना जाता है.
ध्वज का स्वरूप और मंदिर की दिव्य शिल्पकला
10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा यह त्रिकोणीय भगवा ध्वज भगवान राम के तेज और आदर्शों का प्रतीक है. शिखर पारंपरिक उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली में निर्मित है, जबकि मंदिर परिसर का विशाल परकोटा दक्षिण भारतीय शैली को दर्शाता है—यह समन्वय भारत की सांस्कृतिक विविधता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है.
मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण के 87 प्रसंगों को पत्थरों पर बारीकी से उकेरा गया है. वहीं परिसर की घेरेदार दीवारों पर भारतीय सभ्यता के 79 महत्वपूर्ण दृश्यों को कांस्य पट्टों पर उकेरा गया है. ये कलाकृतियां श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन, आदर्शों और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से जोड़ती हैं.
अयोध्या में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
इस भव्य आयोजन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं. अयोध्या में पांच स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. SPG, NSG, ATS, CRPF, PAC और UP पुलिस की विशेष टीमें तैनात की गई हैं. 14 SP, 30 ASP और 90 DSP के साथ 10,000 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को लगाया गया है. एंटी-ड्रोन सिस्टम, बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड भी सक्रिय हैं. एयरपोर्ट पर CISF सुरक्षा में जुटी है.
साढ़े सात हजार विशिष्ट अतिथि होंगे उपस्थित
मंदिर परिसर को 100 टन फूलों और भव्य लाइटिंग से सजाया गया है. इस आयोजन में लगभग 7,500 विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे. इनमें मुकेश अंबानी, मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, मोरारी बापू, धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन ठाकुर और चिन्मयानंद समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहेंगी.अयोध्या आज एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है—धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता के इस संगम का हर क्षण रामभक्तों के लिए अविस्मरणीय बन चुका.
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