वित्त मंत्री और RBI गवर्नर बनकर की साइबर ठगी, 6 साल तक टीचर के साथ किया स्कैम, 70 लाख से ज्यादा ऐंठे

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शख्स को लॉटरी जीतने के नाम पर 70 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया.

Ghazipur lottery scam Teacher duped of Rs 70 lakh
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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शख्स को लॉटरी जीतने के नाम पर 70 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया. यह मामला खजुआ गंगौली कोतवाली कासिमाबाद क्षेत्र का है, जहां साइबर ठगों ने एक टीचर को लगातार ठगा और उसे अपने झांसे में फंसा लिया. यह घटना 2019 से 2024 तक चली, और आरोपी ने पीड़ित से कई अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए. जानिए, कैसे लॉटरी के नाम पर हुई यह धोखाधड़ी और आखिरकार साइबर सेल ने इस मामले में क्या कार्रवाई की.

झांसा देने के लिए बदलते रहे चेहरे

पीड़ित टीचर के अनुसार, 2019 में उसे एक फोन कॉल आया, जिसमें महिला ने खुद को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और एक व्यक्ति ने खुद को आरबीआई गवर्नर शशिकांत दास बताया. इन फर्जी अधिकारियों ने पीड़ित से कहा कि उसे लॉटरी की बड़ी रकम मिलने वाली है, और इसके लिए उसे तुरंत पैसे भेजने होंगे. वित्त मंत्री के नाम पर कहा गया कि उसकी लॉटरी की राशि जल्द ही 1.5 करोड़ से बढ़ाकर 7 करोड़ कर दी जाएगी, जिससे उसे और भी पैसे मिलने का भरोसा दिलाया गया.

इसके बाद, पीड़ित ने कई बार अपने पैसे अलग-अलग खातों में भेजे, जिसमें राकेश सिंह के खाते में 56,000 रुपये और शोभा साहनी के खाते में लगभग 4 लाख रुपये शामिल थे. इस तरह साइबर ठगों ने उसे झांसा दिया और लगातार पैसे वसूलते रहे.

धमकी देकर जारी रखा ठगी का सिलसिला

सिर्फ लॉटरी की बढ़ी हुई राशि का लालच नहीं, ठगों ने पीड़ित को धमकी भी दी कि अगर उसने पैसे नहीं भेजे तो उसके परिवार को नुकसान हो सकता है. साइबर ठगों ने उसे डराया कि वे उसकी पत्नी और बच्चों को उठा लेंगे और लॉटरी के कागजात तैयार हैं, जो उसके खाते में पैसे भेजने के बाद ही सही होंगे. इस डर से टीचर ने और भी पैसे ठगों को भेजने शुरू कर दिए, और ऐसा करते-करते उसका लगभग 70 लाख रुपये का नुकसान हो गया.

कर्ज और गहनों का सहारा लिया, फिर भी ठगी नहीं रुकी

पीड़ित टीचर ने अपनी सारी जमा पूंजी इस ठगी में गंवा दी. उसने अपने सर्विस अकाउंट से लोन लिया, रिश्तेदारों से कर्ज लिया और यहां तक कि अपनी पत्नी के गहने बेचकर पैसे ठगों को दिए. इसके अलावा, उसने अपने लाइफ इंश्योरेंस से लोन लिया और जमीन खरीदने के लिए जो पैसे बचाए थे, वह भी ठगों को दे दिए. लेकिन फिर भी ठगों का पैसों का सिलसिला नहीं रुका. कुल मिलाकर, उसने विभिन्न तरीकों से साइबर ठगों को ₹70,06,500 का भुगतान किया.

साइबर सेल की कार्रवाई और कानूनी पहल

जब टीचर को समझ में आया कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है, तो उसने गाजीपुर साइबर सेल से संपर्क किया और अपनी पूरी आपबीती सुनाई. साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 11 बैंक खातों और 12 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और आगे की जांच शुरू कर दी है. पीड़ित को उम्मीद है कि पुलिस इस मामले को शीघ्र सुलझाएगी और ठगों को सजा दिलवाएगी.

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