बिहार में दलितों के फेवरेट पीएम मोदी, तेजस्वी और राहुल की क्या है स्थिति, सर्वे में बड़ा खुलासा

बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां दलित समुदाय की भूमिका पहले से कहीं ज़्यादा निर्णायक हो गई है. नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गेनाइजेशन्स (NACDOAR) और द कन्वर्जेंट मीडिया (TCM) द्वारा किया गया ताज़ा सर्वे इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में दलित मतदाता सत्ता की चाबी तय कर सकते हैं.

PM Modi, Tejaswi and Rahul, the favourites of Dalits in survey Bihar news
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Bihar Chunav Survey: बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां दलित समुदाय की भूमिका पहले से कहीं ज़्यादा निर्णायक हो गई है. नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गेनाइजेशन्स (NACDOAR) और द कन्वर्जेंट मीडिया (TCM) द्वारा किया गया ताज़ा सर्वे इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में दलित मतदाता सत्ता की चाबी तय कर सकते हैं. यह सर्वे 10 जून से 4 जुलाई 2025 तक बिहार की 49 विधानसभा सीटों पर किया गया, जिसमें कोसी, मिथिलांचल, सीमांचल, भोजपुर, चंपारण और मगध-पाटलिपुत्र जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया. सर्वे की खास बात यह रही कि इसे 98 दलित कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया और इसमें राज्य की 23 प्रमुख दलित जातियों को प्रतिनिधित्व मिला, जिनमें दुसाध, रविदास और मुसहर समुदाय के लोग प्रमुख रहे.

सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले

इस सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले हैं, क्योंकि ये न सिर्फ मौजूदा राजनीतिक धाराओं पर सवाल उठाते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि दलित समुदाय अब किस आधार पर नेताओं को चुन रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी भी दलितों के बीच सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं और उन्हें 47.51 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ है. राहुल गांधी ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है और उन्हें 40.30 प्रतिशत दलितों का समर्थन मिला है. वहीं, मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार से अधिक समर्थन मिला है. तेजस्वी को 28.83 प्रतिशत जबकि नीतीश को सिर्फ 22.80 प्रतिशत दलितों का समर्थन हासिल हुआ है. यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि एक समय में नीतीश कुमार को 'महादलितों का मसीहा' कहा जाता था, लेकिन अब उनका आधार सिमटता नज़र आ रहा है.

रामविलास पासवान का नाम सबसे ऊपर

दलित नेता के रूप में अब भी दिवंगत रामविलास पासवान का नाम सबसे ऊपर है. उन्हें 52.35 प्रतिशत दलितों ने अब तक का सबसे बड़ा नेता माना, खासकर दुसाध और अन्य छोटी जातियों में उनका प्रभाव सबसे अधिक दिखा. चिराग पासवान ने भी अपनी राजनीतिक जमीन मज़बूत की है और 25.88 प्रतिशत दलितों ने उन्हें पसंदीदा नेता बताया है. रविदास और चर्मकार समुदाय में हालांकि बाबू जगजीवन राम का प्रभाव अब भी बरकरार है.

सीमांचल में एनडीए को बढ़त 

राजनीतिक दलों के लिहाज से देखें तो महागठबंधन को इस सर्वे में 46.13 प्रतिशत दलित समर्थन मिला है, जबकि एनडीए को 31.93 प्रतिशत. कोसी और भोजपुर जैसे क्षेत्रों में महागठबंधन की पकड़ काफी मज़बूत है, जबकि सीमांचल में एनडीए को बढ़त मिलती दिखाई दी. जातिगत जनगणना, बेरोजगारी और आरक्षण जैसे मुद्दे दलित समुदाय की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर हैं. बेरोजगारी को 58.85 प्रतिशत दलितों ने सबसे बड़ा मुद्दा बताया है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार भी प्रमुख चिंता के विषय बने हुए हैं. जातिगत जनगणना का श्रेय अधिकांश दलित प्रधानमंत्री मोदी को देते हैं, लेकिन राहुल और तेजस्वी को भी महत्वपूर्ण योगदानकर्ता माना गया है.

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