Indian Navy: भारतीय नौसेना लगातार अपनी समुद्री ताकत को मजबूत करने में जुटी है और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. वर्ष 2047 तक पूरी तरह स्वदेशी रक्षा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य के तहत एक के बाद एक आधुनिक युद्धपोत बेड़े में शामिल किए जा रहे हैं. इसी क्रम में प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार नीलगिरी क्लास का उन्नत स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS तारागिरी अब नौसेना में शामिल होने के लिए तैयार है.
नौसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस अत्याधुनिक युद्धपोत को 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा. इस खास मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्वयं इसे भारतीय नौसेना को समर्पित करेंगे.
प्रोजेक्ट 17A: आत्मनिर्भर भारत की बड़ी पहल
नीलगिरी क्लास फ्रिगेट प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात अत्याधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का हिस्सा हैं. इससे पहले जनवरी 2025 में INS नीलगिरी को नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद इसी साल INS हिमगिरी और INS उदयगिरी भी बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं. अब इस सीरीज का अगला युद्धपोत INS तारागिरी है, जो चौथा फ्रिगेट होगा.
इससे पहले वर्ष 2026 की शुरुआत में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ को भी नौसेना में शामिल किया गया था, जो समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करता है.
INS तारागिरी: ताकत और तकनीक का संगम
INS तारागिरी एक गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे आधुनिक युद्ध जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-रोल क्षमता है, जो इसे समुद्र में बेहद खतरनाक बनाती है.
यह युद्धपोत दुश्मन के हमलों को दूर से पहचानने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है. इसमें अत्याधुनिक सोनार सिस्टम, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है, जो इसे हर परिस्थिति में प्रभावी बनाता है.
हेलिकॉप्टर ऑपरेशन और गति
इस फ्रिगेट में एक बड़ा हेलिकॉप्टर हैंगर भी मौजूद है, जहां दो हेलिकॉप्टर एक साथ लैंड और ऑपरेट कर सकते हैं. यह सुविधा समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाती है.
करीब 6700 टन वजनी यह युद्धपोत लगभग 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है, जिससे यह तेजी से किसी भी ऑपरेशन क्षेत्र में पहुंचने में सक्षम है.
पूरी तरह स्वदेशी निर्माण पर जोर
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे इन फ्रिगेट्स में करीब 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं. इतना ही नहीं, इनका डिजाइन और स्टील भी पूरी तरह भारतीय है. इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दर्शाता है.
इन सात युद्धपोतों में से चार का निर्माण मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा किया गया है. 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है और अब इनके समुद्री परीक्षण और कमीशनिंग की प्रक्रिया जारी है.
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