मिडिल ईस्ट तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने PM मोदी को घुमाया फोन, जानें क्या-क्या हुई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत की जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि दोनों के बीच पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात पर विस्तार से चर्चा की और इसे वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया.

PM Modi and French President Emmanuel Macron spoke on the phone West Asia tensions
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की. दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा की स्थिति को बहाल करने तथा समुद्री मार्ग पर आवाजाही की स्वतंत्रता को जल्द से जल्द पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. 

दोनों नेताओं के बीच हुई महत्वपूर्ण चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत की जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि दोनों के बीच पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात पर विस्तार से चर्चा की और इसे वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया.

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर फोकस

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान संकट को ध्यान में रखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. दोनों देशों ने इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई और समुद्री परिवहन के महत्व को स्वीकार किया. यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अन्य व्यापारिक गतिविधियों के लिए अहम है.

भारत और फ्रांस का सामूहिक प्रयास

पीएम मोदी ने इस बातचीत के दौरान यह भी कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर सहयोग करेंगे. दोनों देशों ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने और हालात को सामान्य बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, दोनों नेताओं ने शांति कायम रखने के लिए कूटनीतिक कदमों की जरूरत पर बल दिया.

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है, जो दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है. यदि इस मार्ग में किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, माल ढुलाई और बीमा लागत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने और सुरक्षित आवाजाही की मांग लगातार उठ रही है.

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