तीन साल से ज्यादा समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब सिर्फ सीमा पर लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है. अब इसकी चोट सीधे रूस के अंदर आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगी है. पहली बार राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी खुले तौर पर माना है कि देश “मुश्किल दौर” से गुजर रहा है.
हालात ऐसे हैं कि रूस में कई जगह पेट्रोल और डीजल की कमी देखने को मिल रही है. कुछ शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और लोगों को ईंधन भरवाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. जो देश दुनिया के सबसे बड़े तेल और डीजल निर्यातकों में से एक माना जाता है, वहां इस तरह की स्थिति ने सबको चौंका दिया है.
पुतिन ने क्या कहा?
यूनाइटेड रशिया पार्टी के एक सम्मेलन में पुतिन ने माना कि देश कई चुनौतियों से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार हालात संभालने की कोशिश कर रही है और लोगों को ईंधन की कमी से राहत देना प्राथमिकता है.
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर यूक्रेन का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ था कि मौजूदा समस्याएं युद्ध और हमलों से जुड़ी हैं.
ईंधन सप्लाई पर दबाव क्यों बढ़ा?
रूस सरकार के अधिकारियों ने भी माना है कि कई इलाकों में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है. खासकर खेती के मौसम में डीजल की मांग बढ़ने से समस्या और गंभीर हो गई है.
सरकार ने साफ किया है कि पहले घरेलू जरूरतों को पूरा किया जाएगा. यहां तक कि यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ी तो डीजल के निर्यात पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है.
यूक्रेन के ड्रोन हमलों का असर
इस संकट की एक बड़ी वजह यूक्रेन के लगातार हो रहे ड्रोन हमले हैं. अब यूक्रेन सिर्फ सीमा पर लड़ाई नहीं कर रहा, बल्कि रूस के अंदर स्थित तेल ढांचों को निशाना बना रहा है.
हाल ही में यूक्रेनी ड्रोन हमलों में रूस की कुछ बड़ी तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है. कुछ जगह आग लगने की भी खबरें आईं, जिससे उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा है.
यूक्रेन का कहना है कि यह रणनीति रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए है, क्योंकि तेल और ऊर्जा उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
संकट इतना बड़ा क्यों बन रहा है?
रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक है. उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस के निर्यात पर निर्भर करती है.
लेकिन जब रिफाइनरियों पर लगातार हमले होते हैं, तो दो बड़ी समस्याएं सामने आती हैं:
यही वजह है कि अब सरकार को घरेलू जरूरत और निर्यात के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है.
भारत से जुड़े सवाल का जवाब
भारत रूस से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदता है, न कि तैयार पेट्रोल या डीजल. यह कच्चा तेल सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
इसे रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है. अब समस्या यह है कि यही रिफाइनरियां यूक्रेन के ड्रोन हमलों के निशाने पर हैं.
इसलिए रूस में तैयार ईंधन की कमी दिखाई दे रही है, जबकि कच्चे तेल का उत्पादन अब भी जारी है.
आगे क्या हो सकता है?
अगर हमले ऐसे ही चलते रहे तो रूस को घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देनी पड़ेगी और संभव है कि वह तेल निर्यात पर कुछ पाबंदियां भी लगाए.
फिलहाल सरकार स्थिति को संभालने और सप्लाई सिस्टम को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
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