ना खाना, ना पानी... गाजा में भूखे मर रहे लोग, पूरे देश में फैला कुपोषण, इजरायल क्यों कर रहा ऐसी बेरहमी?

गाजा पट्टी इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रही है.

People are dying of hunger in Gaza Israel is being brutal
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- Internet

नई दिल्ली: गाजा पट्टी इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रही है. खाद्य, जल और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी ने वहां के लोगों को जीवन और मृत्यु के बीच जूझने को मजबूर कर दिया है. भूख और कुपोषण के चलते बच्चों और कमजोर लोगों की मौत की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. स्थानीय लोगों और सहायता संगठनों की रिपोर्टें बताती हैं कि हालात हर दिन और बदतर हो रहे हैं.

भूख बन चुकी है जीवन की सबसे बड़ी चुनौती

गाजा के दक्षिणी इलाके, जैसे खान यूनिस और राफा, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. सात बच्चों के पिता वालिद अबू मोहसेन बताते हैं, “हमारे बच्चों में अब चलने की ताकत भी नहीं बची है. भूख अब सिर्फ एक डर नहीं, बल्कि हमारे घर का हिस्सा बन गई है.” इलाके में महिलाएं और बच्चे सड़क पर बेहोश होकर गिर रहे हैं, क्योंकि उन्हें कई दिनों से खाना नहीं मिला.

सीमित सहायता, बढ़ती चुनौतियां

मार्च से लेकर अब तक गाजा में भोजन, दवा और अन्य मानवीय सहायता की आपूर्ति लगभग पूरी तरह से बंद है. इजरायल द्वारा क्रॉसिंग बंद किए जाने के बाद से स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है. रोटी जैसी बुनियादी चीजें भी अब दुर्लभ हो चुकी हैं और ब्लैक मार्केट में दोगुनी-तिगुनी कीमतों पर बिक रही हैं.

गाजा के अस्पतालों में कुपोषण से पीड़ित मरीजों की भारी भीड़ है. अल-शिफा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद सलमिया ने बताया कि “अब हम सिर्फ इलाज नहीं कर रहे, हम जीवन की आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं.”

बच्चों और महिलाओं पर सबसे अधिक असर

गाजा के सरकारी मीडिया और स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक कुपोषण और भुखमरी के कारण कम से कम 69 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 6.5 लाख बच्चे गंभीर खतरे में हैं. हज़ारों गर्भवती महिलाएं भी पर्याप्त भोजन और प्रसवपूर्व देखभाल के अभाव में संघर्ष कर रही हैं.

सहायता वितरण की चुनौतियां

इजरायल द्वारा सीमित रूप से दी जा रही सहायता का वितरण मुख्य रूप से गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (जीएचएफ) के ज़रिए होता है. यह सहायता वितरण एक जटिल और जोखिम भरा प्रक्रिया है, जिसमें लोग मीलों पैदल चलकर सहायता केंद्रों तक पहुंचते हैं.

अल-जौरा नामक क्षेत्र में लोग घंटों, कभी-कभी रात भर, “सुरक्षित संकेत” की प्रतीक्षा करते हैं, जिसके बाद ही वे सहायता प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं. लेकिन कई बार इस दौरान गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आती हैं, जिनमें दर्जनों लोग घायल या मारे गए हैं.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की धीमी गति

संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों ने गाजा में उत्पन्न हालात को “मानव-निर्मित अकाल” कहा है और बार-बार अपील की है कि सहायता की आपूर्ति सुचारू रूप से की जाए. बावजूद इसके, ज़मीनी हकीकत यह है कि सहायता सीमित मात्रा में ही पहुंच रही है और उससे सभी जरूरतमंदों तक राहत नहीं पहुंच पा रही है.

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