Parliament Monsoon Session: करीब एक सप्ताह तक लगातार हंगामे, स्थगन और राजनीतिक टकराव के बाद संसद के मानसून सत्र में अब सामान्य कामकाज बहाल होने की उम्मीद बढ़ गई है. नीट पेपर लीक, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बना टकराव आखिरकार बातचीत के जरिए सुलझता दिखाई दे रहा है. लोकसभा अध्यक्ष की पहल और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बनी सहमति के बाद अब संसद में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026' पर विस्तृत चर्चा का रास्ता साफ हो गया है. माना जा रहा है कि इस बहस के साथ न केवल संसद की कार्यवाही पटरी पर लौटेगी, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर भी महत्वपूर्ण विमर्श शुरू होगा.
एक हफ्ते तक क्यों ठप रहा संसद का कामकाज?
मानसून सत्र की शुरुआत से ही लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामे का माहौल बना रहा. विपक्ष ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक के आरोपों और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को प्रमुख मुद्दा बनाया. विपक्षी दलों का कहना था कि सरकार को इन मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाना चाहिए. इन्हीं मांगों को लेकर सदन में बार-बार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके चलते कई अहम विधायी कार्य तय समय पर नहीं हो सके. लगातार व्यवधान के कारण संसद की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.
विपक्ष की मांगों पर सरकार से टकराव
राज्यसभा में विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में विस्तृत बयान देने की मांग की. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में आई खामियों पर सरकार से जवाब मांगा. वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग उठाई. विपक्ष का तर्क था कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
लोकसभा अध्यक्ष की पहल से बनी सहमति
गतिरोध समाप्त कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं के साथ लगातार बातचीत की. उन्होंने इस विषय को करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सभी दलों से सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस विषय पर छह घंटे से अधिक समय तक चर्चा कराने को तैयार है, ताकि प्रत्येक दल अपनी बात विस्तार से रख सके. इसी पहल के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति बनने का रास्ता खुला.
संसदीय कार्य मंत्री ने क्या कहा?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि देश की जनता संसद की कार्यवाही पर नजर रखे हुए है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विधेयक पारित कराना नहीं है, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है जिससे भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके. सरकार का मानना है कि यह संशोधन शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
क्या है सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026?
सरकार द्वारा पेश किया गया 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026' प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं और संगठित पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है. इस विधेयक का मकसद परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसना, नकल और पेपर लीक के नेटवर्क को खत्म करना तथा युवाओं का प्रतियोगी परीक्षाओं पर भरोसा दोबारा मजबूत करना है. सरकार इसे शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार बता रही है.
ये भी पढ़ें- तमिलनाडु की विजय सरकार को बड़ा झटका, मद्रास हाई कोर्ट ने करूर भगदड़ से जुड़े इस फैसले पर लगाई रोक