लंदन: ब्रिटेन में बाल यौन शोषण से जुड़ा एक बड़ा और भयावह मामला सामने आया है, जिसने देश की कानून व्यवस्था, प्रशासन और सामाजिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है. एक नई जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के 85 इलाकों में संगठित यौन अपराध करने वाले रेप गैंग्स सक्रिय हैं, जो मुख्य रूप से गरीब और नाबालिग गोरी लड़कियों को अपना शिकार बना रहे हैं.
इन आरोपों को ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोवे ने संसद में उठाया और उन्होंने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी विस्तृत जानकारी साझा की. लोवे के अनुसार, इन गिरोहों के अधिकतर सदस्य पाकिस्तानी मूल के हैं और इनकी गतिविधियां 1960 के दशक से जारी हैं.
गरीब लड़कियों को निशाना बनाते
इस जांच में सैकड़ों पीड़ितों और उनके परिवारों से बातचीत की गई और फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन (FOI) अधिनियम के तहत प्राप्त हजारों शिकायतों की समीक्षा की गई. रिपोर्ट में बताया गया है कि यह गिरोह लंबे समय से बेहद सुनियोजित ढंग से गरीब, सामाजिक रूप से असुरक्षित लड़कियों को निशाना बनाते हैं.
इन मामलों में सबसे चिंता की बात यह है कि बच्चियों को मात्र 11 या 12 साल की उम्र में शिकार बनाया गया. रिपोर्ट बताती है कि ये अपराध एक बार नहीं, सालों तक लगातार किए जाते रहे.
पुलिस और प्रशासन की चुप्पी
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जिन संस्थानों पर लोगों को भरोसा होता है, जैसे कि पुलिस, सामाजिक सेवाएं और क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस (CPS) उन्होंने इन मामलों में न केवल कार्रवाई में देरी की, बल्कि कई बार पीड़ितों को ही दोषी ठहराया गया.
Our Rape Gang Inquiry has today released research detailing eighty-five local authorities in which the gang-based sexual exploitation of children is taking place, or has historically done so.
— Rupert Lowe MP (@RupertLowe10) August 26, 2025
This is one of the most comprehensive exposes of the rape gang scandal to date. pic.twitter.com/lRRRaQeuFN
कुछ मामलों में तो पीड़ित लड़कियों की गवाही को नजरअंदाज कर दिया गया, यह कहते हुए कि वे विश्वसनीय नहीं हैं. कई पुलिस अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि उन्हें डर था कि अगर वे इन गिरोहों के खिलाफ सख्ती दिखाएंगे, तो सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है.
रूपर्ट लोवे का कहना है, "सिर्फ अपराधियों ने नहीं, बल्कि हमारी संस्थाओं ने भी इन लड़कियों को धोखा दिया है. जिन अधिकारियों को न्याय दिलाने का काम सौंपा गया था, उन्होंने डर और राजनीतिक दबाव में आंखें मूंद लीं."
टेलफोर्ड और रोथरहम: दो इलाके, हजारों पीड़ित
टेलफोर्ड
रिपोर्ट के अनुसार, टेलफोर्ड में पिछले 40 सालों में 1,000 से ज्यादा लड़कियों का यौन शोषण और मानव तस्करी की गई. इनमें से अधिकांश घटनाएं गुप्त रूप से और बार-बार होती रहीं, बिना किसी कार्रवाई के.
रोथरहम
इसी तरह, रोथरहम में 1997 से 2013 के बीच करीब 1,500 लड़कियों को यौन हिंसा का सामना करना पड़ा. यह मामला पहले भी चर्चा में आया था, लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि ये घटनाएं किसी एक शहर या काल तक सीमित नहीं थीं, बल्कि पूरे देश में फैली हुई थीं.
सांसद की मांग: जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई
रूपर्ट लोवे ने इन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए कड़े कदम उठाने की मांग की है. उनका कहना है, "अगर कोई विदेशी नागरिक इन गिरोहों का हिस्सा है या इनकी गतिविधियों के बारे में जानकर भी चुप रहा है, तो उसे ब्रिटेन से तत्काल बाहर निकाला जाना चाहिए. अगर कोई ब्रिटिश नागरिक दोषी है या दोषियों की मदद की है, तो उसे न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए."
लोवे का कहना है कि यह केवल अपराध का मामला नहीं, बल्कि ब्रिटेन की संस्थागत नैतिकता और न्याय व्यवस्था की परीक्षा है.
सरकार की पुरानी चूक और हालिया पहल
इससे पहले भी 2022 में स्वतंत्र जांच आयोग (IICSA) की रिपोर्ट में बाल यौन शोषण को "राष्ट्रव्यापी महामारी" बताया गया था. सात साल की जांच में यह सामने आया था कि हजारों बच्चों के साथ संगठित रूप से यौन शोषण हुआ, लेकिन सरकार और स्थानीय प्रशासन ने उचित और समय पर कार्रवाई नहीं की.
इस रिपोर्ट में 20 सिफारिशें दी गई थीं, जिनमें:
और जातीय और राष्ट्रीय पहचान के आधार पर अपराध की समझ विकसित करना शामिल था.
एलन मस्क की प्रतिक्रिया
जनवरी 2025 में टेस्ला और X (पूर्व ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने ब्रिटेन में सक्रिय ग्रूमिंग गैंग्स की सार्वजनिक रूप से कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि ऐसी घटनाओं पर चुप्पी, समाज की गिरावट का संकेत है. इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने बैरोनेस लुईस केसी को इस पूरे मामले की डेटा स्टडी और ऑडिट करने का निर्देश दिया.
रैपिड ऑडिट रिपोर्ट (जून 2025)
इस रिपोर्ट में पाया गया कि:
रिपोर्ट में 12 सिफारिशें दी गईं, जिनमें सबसे अहम थी- एक राष्ट्रीय जांच आयोग की स्थापना. इसके बाद प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने जून 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर जांच की शुरुआत की, जो आने वाले महीनों में विस्तृत रूप से इन मामलों की पड़ताल करेगी.
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