Gaza Board Of Peace: शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया ट्रंप का न्योता, 'बोर्ड ऑफ पीस' में होगा शामिल

पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित किए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace – BoP) में शामिल होने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.

Pakistan will join Trumps Gaza Board of Peace Plan
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Gaza Board Of Peace: पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित किए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace – BoP) में शामिल होने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस फैसले की औपचारिक पुष्टि पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा कि पाकिस्तान गाजा शांति योजना के समर्थन में इस मंच से जुड़ने जा रहा है.

इशाक डार के अनुसार, पाकिस्तान ने यह निर्णय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत लिया है और वह गाजा में स्थायी शांति, संघर्ष विराम, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण की दिशा में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करेगा.

गाजा संकट पर पाकिस्तान की स्थिति स्पष्ट

अपने बयान में इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होकर स्थायी युद्धविराम, गाजा में राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति और क्षेत्र के पुनर्निर्माण की कोशिशों में सहयोग करेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान पूर्वी यरुशलम (अल-कुद्स अल-शरीफ) को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के पक्ष में है और इसके लिए एक न्यायसंगत व समयबद्ध राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन करता है.

उनका कहना था कि यह पहल न सिर्फ मौजूदा संकट को कम करने में मदद करेगी, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के समाधान की दिशा में भी एक ठोस कदम साबित हो सकती है.

ट्रंप प्रशासन ने भेजा था न्योता

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान को यह न्योता पिछले सप्ताह भेजा गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन युद्ध के बाद गाजा में शासन व्यवस्था और पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बोर्ड और उससे जुड़े अन्य निकायों का गठन कर रहा है.

इसी क्रम में अमेरिका ने दुनिया के कई देशों से संपर्क कर उन्हें बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था. पाकिस्तान ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए खुद को गाजा में शांति प्रक्रिया का समर्थक बताया है.

पाक विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भेजे गए न्योते के जवाब में यह फैसला लिया गया है. बयान में कहा गया कि पाकिस्तान, UNSC प्रस्ताव 2803 के दायरे में रहते हुए गाजा शांति योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करने के उद्देश्य से बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होगा.

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की भागीदारी का मकसद किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और मानवीय समाधान को बढ़ावा देना है.

पाकिस्तान को क्या उम्मीदें हैं?

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, पाकिस्तान को उम्मीद है कि बोर्ड ऑफ पीस के गठन से-

  • गाजा में स्थायी संघर्ष विराम को लागू करने में मदद मिलेगी
  • फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए मानवीय सहायता को और तेज किया जा सकेगा
  • युद्ध से तबाह हुए गाजा के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को गति मिलेगी

इसके अलावा पाकिस्तान ने यह भी उम्मीद जताई कि यह मंच फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार को साकार करने की दिशा में एक भरोसेमंद और समयबद्ध राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप होगी.

‘रचनात्मक भूमिका निभाने’ का दावा

अपने बयान के अंत में पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह बोर्ड ऑफ पीस के भीतर रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाने की कोशिश करेगा. इस्लामाबाद का दावा है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता, संवाद और शांति स्थापना से जुड़े प्रयासों में सक्रिय योगदान देना चाहता है.

सदस्यता को लेकर शर्तों की चर्चा

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसने ऐसे दस्तावेज देखे हैं, जिनके अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने लगभग 60 देशों को भेजे गए एक ड्राफ्ट चार्टर में यह शर्त रखी है कि यदि कोई देश बोर्ड ऑफ पीस की सदस्यता तीन साल से अधिक समय तक बनाए रखना चाहता है, तो उसे 1 अरब डॉलर नकद योगदान देना होगा.

हालांकि, इस शर्त को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

किन देशों ने अब तक हामी भरी?

पाकिस्तान के इस फैसले के साथ वह उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने पर सहमति जताई है. अब तक

  • हंगरी
  • इजरायल
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

जैसे कुछ ही देशों ने बिना किसी शर्त के इस पहल में शामिल होने की पुष्टि की है.

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