Saudi-Houthi Conflict: मिडिल ईस्ट की जंग में सऊदी अरब अब मुश्किल में फंसता नजर आ रहा है. खास बात यह है कि इस लड़ाई में वह काफी हद तक अकेला पड़ गया है. हूती के विद्रोही लगातार सऊदी को निशाना बना रहे हैं. इन हमलों से निपटने के लिए सऊदी को पाकिस्तान, तुर्की और अमेरिका से मदद की उम्मीद थी, लेकिन तीनों ही देशों ने दूरी बना ली है. अब अमेरिका का रुख भी साफ हो गया है.
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद मांगी थी, लेकिन ट्रंप ने इससे इनकार कर दिया. माना जा रहा है कि इसकी एक वजह ईरान के खिलाफ जंग के दौरान सऊदी का अमेरिका को समर्थन न देना है. अब अमेरिका ने हूती और सऊदी के बीच चल रही लड़ाई से खुद को दूर रखा है.
सऊदी की दलील क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक क्राउन प्रिंस ने गुरुवार को ट्रंप से कहा कि हूती विद्रोही लाल सागर की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. अगर हूती बाब अल मंडेब पर कब्जा कर लेते हैं तो इसका बड़ा असर पड़ सकता है. मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि हूती विद्रोहियों को रोकने के लिए अमेरिका को आगे आना चाहिए.
बैठक की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने एक्सियोस को बताया कि ट्रंप ने सऊदी की मदद करने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका हूती के मामले में दखल देने पर विचार नहीं कर रहा है. इससे पहले 2025 में अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच एक समझौता हुआ था.
अलग-थलग क्यों पड़ा सऊदी?
1. ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया
फरवरी 2026 में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. उस समय अमेरिका को उम्मीद थी कि सऊदी उसका साथ देगा, लेकिन रियाद ने खुद को इस जंग से अलग रखा. सऊदी ने साफ कहा कि वह इस युद्ध का समर्थन नहीं करता है.
सऊदी के रुख के कारण अमेरिकी फाइटर जेट्स को ईरान पर हमले में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. सऊदी ने अमेरिकी विमानों को ईंधन भरने के लिए अपने यहां उतरने की अनुमति तक नहीं दी.
कई मौकों पर सऊदी के रुख की वजह से अमेरिका को ईरान पर हमला टालना पड़ा. राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सऊदी को लेकर नाराजगी जताई थी. हालांकि, सऊदी ने अपना रुख नहीं बदला.
अब जब सऊदी खुद हूती के खिलाफ लड़ाई में फंसा है तो उसने अमेरिका से मदद मांगी, लेकिन अमेरिका ने फिलहाल सहायता देने से इनकार कर दिया है.
2. पाकिस्तान और तुर्की पर ज्यादा भरोसा
सऊदी की एक बड़ी गलती पाकिस्तान और तुर्की पर भरोसा करना भी मानी जा रही है. कुछ महीने पहले सऊदी ने तुर्की के साथ मिलकर पाकिस्तान की अगुवाई में मक्का रक्षा समझौता किया था. इसके तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में इसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.
सऊदी को उम्मीद थी कि इस समझौते के बाद किसी भी संकट में पाकिस्तान और तुर्की उसकी मदद के लिए आगे आएंगे. लेकिन हूती के खिलाफ मौजूदा लड़ाई में पाकिस्तान ने चुप्पी साध रखी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पाकिस्तान फिलहाल हूती हमलों को लेकर किसी कार्रवाई पर विचार नहीं कर रहा है.
हूती को ईरान समर्थित मिलिशिया माना जाता है. ऐसे में हूती पर हमला करने का मतलब ईरान को नाराज करना होगा. पाकिस्तान फिलहाल ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता.
3. ईरान से खराब रिश्ते, यूएई से भी तनाव
सऊदी और ईरान के रिश्ते पहले से ही खराब रहे हैं. वहीं यूएई के साथ भी सऊदी का विवाद हो चुका है. यमन में नियंत्रण को लेकर सऊदी ने यूएई के टैंकरों पर हमला किया था. ईरान के खिलाफ जंग के दौरान भी सऊदी ने यूएई की मदद नहीं की थी. अब माना जा रहा है कि यूएई भी सऊदी की मदद करने से दूरी बना सकता है.
हूती सऊदी के खिलाफ क्यों है?
हूती यमन का एक विद्रोही समूह है, जिसे ईरान का करीबी माना जाता है. यमन और सऊदी अरब की सीमा आपस में लगती है. हूती विद्रोही यमन की सरकार के खिलाफ गृह युद्ध लड़ रहे हैं. इस लड़ाई में सऊदी की सरकार यमन की सरकार के साथ खड़ी है. इसी वजह से हूती सऊदी को निशाना बनाते हैं.
हालिया ईरान युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने तेहरान की नाकाबंदी शुरू की, तो ईरान ने हूती की मदद से लाल सागर में दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया. ब्लूमबर्ग के मुताबिक इसका असर सऊदी की तेल सप्लाई पर भी पड़ा है.
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी का तेल उत्पादन जुलाई में करीब 8.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, जो अगस्त में घटकर 6.26 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया. यानी तेल उत्पादन में करीब 23 प्रतिशत की गिरावट आई.
हूती से कोई क्यों नहीं लड़ना चाहता?
हूती के लड़ाके गुरिल्ला युद्ध में माहिर माने जाते हैं. 2025 में अमेरिका ने भी हूती के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. इजराइल ने भी हूती के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन वह भी कामयाब नहीं हो सका.
हूती लड़ाकों का लाल सागर के एक अहम हिस्से पर नियंत्रण है. यहां से तेल और गैस की करीब 12 प्रतिशत सप्लाई होती है. यही वजह है कि कोई भी देश सीधे हूती के खिलाफ इस लड़ाई में उतरने से बच रहा है.
ये भी पढ़ें- यूक्रेन में सेना भेजना मतलब रूस के खिलाफ सीधा युद्ध! भारत की जमीन से पुतिन की चेतावनी, खींच दी रेड लाइन