पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब... क्या भारत अकेले कर सकता है इस्लामिक NATO का मुकाबला? जानें ताकत

तुर्की अब पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते का हिस्सा बन गया है. इसके बाद तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत हुआ है.

Pakistan Turkiye Saudi Arabia Can India fight an Islamic NATO simultaneously
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Islamic NATO: तुर्की अब पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से मौजूद रक्षा समझौते का हिस्सा बन गया है. इसके बाद तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और मजबूत हुआ है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कुछ विशेषज्ञ इसे ‘इस्लामिक NATO’ का नाम दे रहे हैं. समझौते के तहत अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों एक-दूसरे का साथ देंगे.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब का रक्षा सहयोग आगे और मजबूत होता है तो भारत के सामने उनकी संयुक्त सैन्य ताकत कितनी बड़ी होगी. क्या भारत इन तीनों देशों का एक साथ मुकाबला कर सकता है?

क्या है इस्लामिक NATO?

पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. इसका मकसद सैन्य सहयोग बढ़ाना, सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है.

हालांकि, इसे अभी NATO जैसा आधिकारिक सैन्य संगठन नहीं कहा जा सकता. इसके पास NATO की तरह लंबे समय से बनी कमान व्यवस्था, सैन्य एकीकरण और व्यापक राजनीतिक ढांचा नहीं है.

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब की ताकत

तीनों देशों की अपनी अलग सैन्य ताकत है. तुर्की को पारंपरिक सैन्य क्षमता और रक्षा तकनीक के मामले में मजबूत माना जाता है. उसके पास ड्रोन, मिसाइल, नौसैनिक जहाज और बख्तरबंद वाहन बनाने की क्षमता बढ़ रही है. Bayraktar TB2 और Akinci जैसे ड्रोन उसकी रक्षा तकनीक की पहचान बन चुके हैं.

वहीं पाकिस्तान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत उसकी परमाणु क्षमता है. सऊदी अरब के पास भी बड़ी रक्षा ताकत और आधुनिक हथियार हैं.

भारत के मुकाबले कितनी है सैन्य ताकत?

कुछ क्षेत्रों में भारत इन तीनों देशों से आगे है, जबकि कुछ मामलों में तीनों देशों की संयुक्त ताकत भारत से ज्यादा है. इसलिए केवल सैनिकों या हथियारों की संख्या के आधार पर किसी देश की पूरी सैन्य क्षमता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.

ग्लोबल फायरपावर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास करीब 14.3 लाख सक्रिय सैनिक हैं. वहीं पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब को मिलाकर करीब 13.8 लाख सक्रिय सैनिक बताए गए हैं. यानी सक्रिय सैनिकों की संख्या में भारत थोड़ा आगे है.

लड़ाकू विमानों में तीनों देशों का आंकड़ा ज्यादा

भारत के पास करीब 476 लड़ाकू विमान बताए जाते हैं. इसके अलावा भारत करीब 200 नए लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है.

वहीं पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के पास मिलाकर करीब 900 लड़ाकू विमान बताए जाते हैं. इस मामले में तीनों देशों की संयुक्त संख्या भारत से ज्यादा है.

टैंकों की बात करें तो भारत के पास करीब 4,000 टैंक हैं, जबकि पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के पास मिलाकर करीब 5,800 टैंक बताए जाते हैं.

परमाणु ताकत में भारत और पाकिस्तान

परमाणु हथियारों की बात करें तो भारत के पास करीब 190 परमाणु हथियार बताए जाते हैं. पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं. तुर्की और सऊदी अरब के पास अपने परमाणु हथियार नहीं हैं.

क्या भारत तीनों का मुकाबला कर सकता है?

सैन्य क्षमता के कुछ क्षेत्रों में भारत अकेले पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब से आगे है, जबकि कुछ क्षेत्रों में तीनों देशों की संयुक्त ताकत ज्यादा है.

सक्रिय सैनिकों की संख्या में भारत थोड़ा आगे है, लेकिन लड़ाकू विमानों और टैंकों की कुल संख्या में तीनों देशों का आंकड़ा ज्यादा है. परमाणु ताकत के मामले में भारत और पाकिस्तान दोनों महत्वपूर्ण स्थिति में हैं. वहीं नौसैनिक ताकत के मामले में भारत की स्थिति मजबूत मानी जाती है.

किसके पास कितनी ताकत?

भारत के पास करीब 14.3 लाख सक्रिय सैनिक, 476 लड़ाकू विमान, 4,000 टैंक, करीब 190 परमाणु हथियार, 18 पनडुब्बियां और 2 विमानवाहक पोत बताए जाते हैं.

वहीं पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब को मिलाकर करीब 13.8 लाख सैनिक, लगभग 900 लड़ाकू विमान और करीब 5,800 टैंक हैं. तीनों देशों की संयुक्त रक्षा क्षमता करीब 120 अरब डॉलर बताई जाती है, जबकि भारत का रक्षा बजट करीब 86 अरब डॉलर है.

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