पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सरकार और आम जनता के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात को नियंत्रित करने के लिए इस्लामाबाद से 3000 से अधिक सुरक्षा जवान पीओके भेजे गए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी इलाके में लगा लॉकडाउन हटाया नहीं जा सका है. यह लॉकडाउन पाकिस्तान कश्मीर पब्लिक एक्शन कमेटी के अध्यक्ष शौकत नवाज मीर की अपील पर लागू किया गया है.
शौकत नवाज मीर पीओके के राजनीतिक व सामाजिक संघर्ष के एक प्रमुख चेहरा हैं. कश्मीर यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने ट्रेड यूनियन और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के जरिए इलाके में अपनी पकड़ मजबूत की. 2024 में महंगाई के खिलाफ उनके नेतृत्व में बड़े प्रदर्शन हुए थे, जिनके कारण सरकार को आटे के दाम घटाने पड़े थे. उनकी रणनीतिक कुशलता के कारण वे एक्शन कमेटी के अध्यक्ष बने हैं, जिसमें पीओके की कई राजनीतिक पार्टियां और बड़े नेता शामिल हैं.
मांगों को लेकर सरकार और एक्शन कमेटी में टकराव
एक्शन कमेटी ने सरकार से कुल 35 मांगों का जवाब मांगा है, जिनमें सबसे बड़ी मांग पीओके में व्याप्त वीआईपी कल्चर को समाप्त करना है. हालांकि सरकार की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मीर ने जनता को संगठित किया और लाल चौक पर विशाल प्रदर्शन कराया.
लॉकडाउन और हालात
28 सितंबर को शौकत नवाज मीर ने मुजफ्फराबाद के लोगों से लाल चौक में प्रदर्शन करने की अपील की, जिसमें लगभग दस हजार से अधिक लोग शामिल हुए. यहां मीर ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए अनिश्चितकालीन लॉकडाउन की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है और सेना की गोलीबारी में पीओके में दो लोगों की मौत हो चुकी है. इस अपील के बाद पूरे पीओके में लॉकडाउन जैसा माहौल बन गया है. इसके बावजूद, मुजफ्फराबाद में मौजूद पाक सेना मीर और जनता के विरोध के कारण कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रही है.
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