PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है. रविवार 23 अगस्त को आंदोलन के 76 दिन पूरे होने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है. इसी बीच अवामी एक्शन कमेटी ने पीओके में एक समानांतर व्यवस्था खड़ी करने का ऐलान किया है.
इस व्यवस्था के तहत पीओके के हर गांव में तीन कमेटियां बनाई जाएंगी. इनमें राजनीतिक कमेटी, वित्तीय कमेटी और रक्षा कमेटी शामिल होगी. अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमान खान ने कहा कि रावलाकोट से जो भी फैसला या निर्देश आएगा, गांवों में बनाई गई ये कमेटियां उसका पालन करेंगी.
इनमें सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा कमेटी को लेकर है. इसके जरिए आंदोलन को स्थानीय स्तर पर संगठित करने और लोगों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था तैयार करने की बात कही जा रही है.
कौन हैं सरदार अमान खान?
सरदार अमान खान अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. वह प्रदर्शन में लगातार सक्रिय रहे हैं और जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के पीओके प्रमुख भी बताए जाते हैं.
रक्षा विशेषज्ञ कर्नल शैलेन्द्र सिंह (सेवानिवृत्त) के मुताबिक, गांव-गांव में रक्षा कमेटियां बनाने का फैसला आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. उनका कहना है कि इन कमेटियों के जरिए प्रदर्शनकारी अपनी सुरक्षा के लिए ज्यादा संगठित हो सकते हैं.
रेंजर्स के सामने खड़ी होंगी रक्षा कमेटियां?
पीओके में 9 जून से 23 अगस्त के बीच प्रदर्शनकारियों ने राजधानी मुजफ्फराबाद की तरफ कई बार मार्च करने की कोशिश की है. आरोप है कि सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए गोलीबारी की.
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि 5 जून से पीओके में इंटरनेट बंद है. उनके मुताबिक, पाकिस्तानी रेंजर्स और फ्रंटियर कॉर्प्स की कार्रवाई में 133 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
ऐसे में अमान खान की ओर से गांवों में रक्षा कमेटियां बनाने के ऐलान को काफी अहम माना जा रहा है. उन्होंने कहा है कि रावलाकोट से आने वाले फैसलों के आधार पर ये कमेटियां आगे काम करेंगी.
पीओके में बढ़ाई जा रही सुरक्षा बलों की मौजूदगी
पीओके में पिछले दो महीनों से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों की तैनाती की बात कही जा रही है. दावा है कि यहां 17,500 से ज्यादा एफसी और रेंजर्स के जवान तैनात हैं और इनकी संख्या बढ़ाने की कोशिश भी जारी है.
21 अगस्त को पलंदरी की तरफ पाकिस्तानी सेना की एक टुकड़ी बसों से पहुंच रही थी. स्थानीय लोगों ने रास्ता रोककर उन्हें शहर के बाहर ही रोक दिया. इसके बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया.
अमान खान ने पलंदरी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने सेना की टुकड़ी को पहले ही रोक दिया था. उन्होंने पाकिस्तानी सेना से पीओके के शहरों से बाहर रहने की अपील भी की. उनका आरोप है कि इसके बावजूद पाकिस्तान के दूसरे इलाकों से रात के समय सैन्य टुकड़ियों को पीओके भेजा जा रहा है.
अमान खान ने सरकार और सेना को दी चेतावनी
अमान खान का आरोप है कि पिछले दो महीनों से पीओके में राशन की सप्लाई प्रभावित है और कई इलाकों में लोगों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है. अवामी एक्शन कमेटी ने राशन की सप्लाई बहाल कराने के लिए आने वाले दिनों में मार्च निकालने का ऐलान किया है.
अमान खान ने कहा कि लोग पाकिस्तान सरकार के दबाव में नहीं आएंगे. उन्होंने सरकार की गोलीबारी वाली नीति का विरोध करते हुए कहा कि पीओके में लोगों की अपनी तय की हुई व्यवस्था और कानून होना चाहिए. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार और सुरक्षा बल आंदोलन को दबाने के लिए गोलीबारी का रास्ता अपनाते हैं तो प्रदर्शनकारी भी पीछे नहीं हटेंगे.
सरकारी व्यवस्था के बहिष्कार का ऐलान
पीओके में 5 जून से स्कूल और कई दुकानें बंद होने की बात कही जा रही है. अमान खान ने कहा कि अब हर मंगलवार और शुक्रवार को दोपहर 2 बजे से दुकानें खोलने की अनुमति होगी. हालांकि, स्कूलों के बहिष्कार को जारी रखने की बात कही गई है.
अवामी एक्शन कमेटी ने पीओके के सरकारी तंत्र के बहिष्कार का भी ऐलान किया है. अमान खान ने लोगों से कहा कि वे सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाएं और आपसी विवाद तथा स्थानीय समस्याओं को मिलकर सुलझाएं.
अधिकारियों पर भी साधा निशाना
अमान खान ने पीओके के अधिकारियों पर भी निशाना साधा. उनका आरोप है कि कुछ अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बयान तो देते हैं, लेकिन लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अधिकारी बिना सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के कोई बड़ा फैसला नहीं लेते. अमान खान ने दावा किया कि पीओके में 190 से ज्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रवासियों, अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े लोगों, पत्रकारों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को अलगाववाद के आरोप में आतंकी घोषित किया गया है.
उन्होंने कहा कि जब लोग अपने अधिकारों की मांग करते हैं तो उन्हें अलगाववादी कहा जाता है. उनका आरोप है कि पाकिस्तान के नेता लंबे समय से पीओके के संसाधनों का इस्तेमाल करते रहे हैं और यहां के लोगों को विकास से दूर रखा गया है.
पीओके चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं?
पीओके में 27 जुलाई से 15 अगस्त के बीच 45 में से 38 सीटों पर मतदान होने की जानकारी दी गई है. पीओके चुनाव आयोग के नतीजों के मुताबिक, 38 सीटों में से 25 सीटें शहबाज शरीफ की पीएमएल-एन, 12 सीटें बिलावल भुट्टो की पीपीपी और एक सीट जम्मू-कश्मीर अवामी दस्त ओ बाजू ने जीती है.
बाकी सात सीटें पूंछ और सुधनोती जिलों में हैं. सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इन सीटों पर अभी मतदान नहीं कराया गया है. इसके चलते नई सरकार बनाने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पाई है.
मतदान प्रतिशत को लेकर भी विवाद
पीओके की 38 सीटों पर हुए मतदान को लेकर भी विवाद है. प्रदर्शनकारियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था और कुछ जगहों पर धांधली के आरोप लगाए गए.
पीओके चुनाव आयोग ने करीब 38 प्रतिशत मतदान होने का दावा किया है. वहीं, अमान खान का कहना है कि असल में केवल 10 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं.
प्रदर्शनकारियों को आतंकी बताने पर पलटवार
प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों को आतंकी बताए जाने पर अमान खान ने पाकिस्तानी सेना पर ही गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पीओके में अपने अधिकारों की मांग करने वाले लोग आतंकी नहीं हैं.
अमान खान ने कहा कि आतंकवाद का आरोप उन लोगों पर लगाया जाना चाहिए जो हथियार लेकर लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं. उन्होंने पीओके की बिजली और सरकारी व्यवस्था की खराब स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर भी लोगों से चंदा जुटाने को कहा जाता है.
अगला मार्च हुआ तो महिलाएं रहेंगी आगे
रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की तरफ अगले मार्च को लेकर भी अमान खान ने बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि अगली बार मार्च में महिलाएं सबसे आगे रहेंगी.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई तो पाकिस्तानी सेना में काम कर रहे पीओके के जवानों को वापस बुलाने की कोशिश की जाएगी. साथ ही सरकारी और सैन्य अधिकारियों के सरकारी घरों का घेराव करने की बात भी कही गई है.
बिजली बिल और टैक्स नहीं देने का ऐलान
अमान खान ने कहा कि जब तक पीओके में आंदोलन जारी रहेगा, तब तक लोग बिजली के बिल और टैक्स नहीं देंगे. उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी के पीओके को 'लाडला बच्चा' कहने वाली टिप्पणी पर भी जवाब दिया.
अमान खान ने कहा कि पीओके के लोग पाकिस्तान पर बोझ नहीं हैं. उन्होंने पाकिस्तान सरकार से पीओके पर किए गए खर्च का हिसाब देने को कहा और दावा किया कि अगर पाकिस्तान ने जितना खर्च किया है उससे ज्यादा यहां से लिया है तो उसे भी इसका हिसाब देना चाहिए.
सरकार समर्थकों के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान
अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार का समर्थन करने वाले लोगों के सामाजिक बहिष्कार का भी ऐलान किया है. अमान खान ने कहा कि जो लोग आंदोलन के दौरान सरकार का साथ देंगे, उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के साथ शादी, अंतिम संस्कार और दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों में भी संबंध नहीं रखे जाएंगे.
इस तरह पीओके में प्रदर्शन अब सिर्फ सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है. अवामी एक्शन कमेटी गांव स्तर पर अपनी अलग व्यवस्था बनाने, सरकारी तंत्र का बहिष्कार करने और आगे बड़े मार्च की तैयारी करने की बात कह रही है. इससे पाकिस्तान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ने की आशंका है.
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