पाकिस्तान की आर्थिक हालत एक बार फिर चिंता बढ़ा रही है. देश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह करीब 83.6 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है. यानी भारतीय रुपये में भी यह रकम बहुत बड़ी है.
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की ताजा जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान के सरकारी कर्ज में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. जून के अंत तक देश पर घरेलू और विदेशी कर्ज को मिलाकर करीब 83.6 ट्रिलियन रुपये का बोझ हो गया था.
चार साल में 75 फीसदी बढ़ा कर्ज
पाकिस्तान पर मौजूद कर्ज में सबसे बड़ा हिस्सा घरेलू कर्ज का है. जून के अंत तक देश का घरेलू कर्ज करीब 59.44 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये था.
इसके अलावा पाकिस्तान पर करीब 24.20 लाख करोड़ रुपये का विदेशी कर्ज भी है. दोनों को जोड़ने पर कुल कर्ज करीब 83.6 ट्रिलियन रुपये बैठता है.
पिछले चार साल के आंकड़ों को देखें तो पाकिस्तान के कर्ज में करीब 75 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यानी सरकार लगातार ज्यादा कर्ज ले रही है और उसका बोझ भी बढ़ता जा रहा है.
कर्ज चुकाने के लिए भी लेना पड़ रहा कर्ज
पाकिस्तान की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है. देश के बजट का करीब 40 से 50 फीसदी हिस्सा पुराने कर्ज और उसके ब्याज को चुकाने में चला जाता है.
इस वजह से सरकार के पास विकास और दूसरी जरूरी योजनाओं के लिए कम पैसा बचता है. कई बार पुराने कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए भी नए कर्ज का सहारा लेना पड़ता है.
यही वजह है कि पाकिस्तान लगातार कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है.
कमाई बढ़ी, लेकिन खर्च उससे ज्यादा
पाकिस्तान सरकार ने टैक्स से होने वाली कमाई बढ़ाने की कोशिश की है. हाल के समय में टैक्स संग्रह में भी बढ़ोतरी हुई है. लेकिन सरकार का खर्च अभी भी काफी ज्यादा है.
सरकारी दफ्तरों का खर्च, मंत्रालयों का संचालन, सब्सिडी और कर्ज का ब्याज जैसी चीजों पर बड़ी रकम खर्च हो रही है.
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं से कर्ज लेता है. इसके साथ ही देश के बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों से भी सरकार की उधारी बढ़ रही है.
पाकिस्तान का घरेलू कर्ज पिछले साल की तुलना में करीब 9 फीसदी बढ़ा है.
सरकार ने कर्ज कम करने के लिए क्या किया?
बढ़ते कर्ज के बीच पाकिस्तान सरकार ने कर्ज का बोझ कम करने की कोशिश भी की है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार ने करीब 2.9 ट्रिलियन रुपये का कर्ज चुकाया.
इसके अलावा देश का कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का अनुपात भी कम हुआ है. यह पहले करीब 75 फीसदी था, जो घटकर लगभग 68.5 फीसदी रह गया है.
यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए थोड़ी राहत की बात जरूर है. लेकिन कुल कर्ज अभी भी बहुत ज्यादा है. ऐसे में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्ज और ब्याज के बढ़ते बोझ को रोकना है. अगर सरकार खर्च और कर्ज को नियंत्रित नहीं कर पाती है, तो आने वाले समय में आर्थिक संकट और गहरा सकता है.
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