इस्लामाबाद/न्यूयॉर्क: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. इस डील को जहां कुछ मुस्लिम देशों द्वारा क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, वहीं बलूच नेता मीर यार बलूच ने इसे एक भयानक खतरे की आहट करार दिया है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को तत्काल सुरक्षित किया जाए, इससे पहले कि इस्लामाबाद उन्हें रणनीतिक या आर्थिक लाभ के लिए अन्य देशों को बेचने की कोशिश करे. उनके मुताबिक, इस कदम से भारत, इज़राइल, बलूचिस्तान, अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिल सकती है.
पाकिस्तान कर सकता है परमाणु हथियारों का सौदा
बलूच प्रतिनिधि मीर यार बलूच ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान सोशल मीडिया पर लिखा, "पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम अब केवल एक राष्ट्रीय रक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि एक व्यापारिक सौदे में बदलता जा रहा है. इस बात की आशंका है कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों को अरब डॉलर के बदले ईरान, तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों को सौंप सकता है."
#IAEA, #USA, #UN and #NATO must take Pakistan's nukes in safe custody to avoid nukes race.
— Mir Yar Baloch (@miryar_baloch) September 24, 2025
Iran, Saudi, Turkey, Pakistan, China nexus is great threat to #India, #Israel, #USA, #Europe, #Afghanistan and #Balochistan.
Iran’s support at the United Nations General Assembly for… pic.twitter.com/HRraHaPfYl
उनका दावा है कि यदि यह गठजोड़ बनता है तो इससे दुनिया को आगामी वर्षों में खरबों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं, ताकि इस नए परमाणु गठबंधन से उपजी अस्थिरता को नियंत्रित किया जा सके.
परमाणु हथियारों की दौड़ से पहले कदम उठाना जरूरी
मीर यार बलूच ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), संयुक्त राष्ट्र, नाटो और अमेरिका जैसे वैश्विक संस्थानों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.
मीर यार बलूच ने कहा, "हमें परमाणु हथियारों की एक नई होड़ से पहले ही अलर्ट हो जाना चाहिए. पाकिस्तान का परमाणु जखीरा अब केवल उनके नियंत्रण में नहीं रह गया है, इसका उपयोग क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन को बिगाड़ने के लिए किया जा सकता है."
उनका कहना है कि पाकिस्तान पहले ही ईरान, चीन, सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर एक नया सामरिक ध्रुव बना रहा है, जो दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के लिए बेहद अस्थिरकारी हो सकता है.
संयुक्त राष्ट्र में ईरान का समर्थन, बलूच नेता का विरोध
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र में इस पाकिस्तान-सऊदी रक्षा डील का समर्थन किया और इसे क्षेत्रीय सहयोग का उदाहरण बताया.
मगर मीर यार बलूच ने ईरान की इस प्रतिक्रिया को खतरनाक बदलाव की शुरुआत कहा. उन्होंने कहा, "यह मुस्लिम देशों के बीच एक सुरक्षा गठबंधन का संकेत है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल स्थिरता नहीं, बल्कि अपने-अपने राजनीतिक और सामरिक एजेंडा को परमाणु हथियारों के सहारे साधना है."
उनका दावा है कि इससे असंतुलित ताकतों को नया बल मिलेगा, और जो देश पहले छद्म युद्धों में शामिल थे, अब वो खुली ताकत के सहारे आगे बढ़ेंगे.
बलूचिस्तान को लेकर पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल
बलूच नेता ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में संघर्ष हार चुका है. उन्होंने कहा कि, "पाक सेना अब बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार नहीं जमा पा रही है. स्थानीय विरोध के कारण उन्हें खनिजों का दोहन करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है."
उनका आरोप है कि अब पाकिस्तानी सरकार और सेना नई रणनीतियों की तलाश में हैं, जिनमें विदेशी सौदे, क्षेत्रीय समझौते और सामरिक हथियारों का प्रयोग शामिल है.
क्या पाकिस्तान परमाणु हथियारों की तस्करी कर सकता है?
बलूच प्रतिनिधि का दावा है कि पाकिस्तान चुपचाप एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा है, जिससे वह अपने परमाणु हथियारों को रियाद, अंकारा और तेहरान जैसे शहरों तक भेज सकता है. उन्होंने कहा, "इससे पहले कि कोई बड़ा हादसा हो, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को संयुक्त राष्ट्र की कस्टडी में लेकर सुरक्षित करना चाहिए."
उनके अनुसार, यह न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है, बल्कि ग्लोबल न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन के सिद्धांतों की रक्षा के लिए भी अनिवार्य है.
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