भारत के खिलाफ लश्कर-ISKP रच रहा साजिश! तिराह घाटी में बनाया ज्वाइंट हेडक्वार्टर, फिदायीन हो रहा तैयार

ISI & ISKP: जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बड़े आतंकी हमले की साजिश रचे जाने की आशंका सामने आई है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के निर्देश पर इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (ISKP) के साथ मिलकर भारत में आने वाले दिनों में हमले की योजना तैयार की है.

Pakistan Lashkar-ISKP plotting against India Joint headquarters built Tirah Valley
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ISI & ISKP: जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बड़े आतंकी हमले की साजिश रचे जाने की आशंका सामने आई है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के निर्देश पर इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रांत (ISKP) के साथ मिलकर भारत में आने वाले दिनों में हमले की योजना तैयार की है. इस नई रणनीति के तहत दोनों संगठनों ने एक साझा आतंकी ढांचा खड़ा किया है, जिसे जम्मू-कश्मीर में सक्रिय किया जाना है.

सूत्रों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 12 फिदायीन आतंकियों का एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया गया है. इस मॉड्यूल को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिनकी कमान आतंकी अबू हुरैरा, मोहम्मद उमर उर्फ खरगोश और मोहम्मद रिजवान उर्फ अबू दुजाना संभाल रहे हैं. हर कमांडर के अधीन चार-चार आतंकी हैं. इस पूरे हाइब्रिड मॉड्यूल की निगरानी लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर हुजैफा बक्करवाल कर रहा है, जो ISI के सीधे संपर्क में बताया जा रहा है.

तिराह घाटी में लश्कर-ISKP का ज्वाइंट हेडक्वार्टर

लश्कर-ए-तैयबा और ISKP ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खैबर जिले की तिराह घाटी में एक संयुक्त हेडक्वार्टर स्थापित किया है. खुफिया जानकारी के मुताबिक इस ज्वाइंट हेडक्वार्टर को ISI की मदद से पहाड़ी इलाके में खड़ा किया गया है. इसकी कमान आतंकी हाफिज़ ज़ुबैर मुजाहिद को सौंपी गई है, जो पहले लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर चुका है.

हाफिज़ ज़ुबैर का आतंकी सफर और ISKP में भूमिका

बताया जाता है कि हाफिज़ ज़ुबैर मुजाहिद लंबे समय तक शमशेर नाई, रफीक नाई और कासिम लाला जैसे आतंकियों के साथ मिलकर भारत में घुसपैठ के नेटवर्क को संभालता रहा. साल 2019 में लश्कर-ए-तैयबा ने उसे ISKP में कमांडर बनाकर भेजा, जिसके बाद उसने बलूचिस्तान में ISKP का बेस खड़ा किया और अफगानिस्तान में कई हमलों को अंजाम दिलवाया. अब उसी को लश्कर-ISKP के इस नए ज्वाइंट हेडक्वार्टर की जिम्मेदारी दी गई है.

अफगानी आतंकियों की जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की योजना

नई रणनीति के तहत इस ज्वाइंट हेडक्वार्टर का मुख्य काम अफगान नागरिकता वाले आतंकियों को जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराना है. मकसद यह है कि पहले से मौजूद 12 सदस्यीय ISKP-लश्कर मॉड्यूल को और बड़ा किया जाए. फिलहाल इस मॉड्यूल के तीनों कमांडर पाकिस्तानी नागरिक हैं, लेकिन आने वाले छह महीनों में ISI का लक्ष्य है कि हर ग्रुप में 15 से 20 आतंकी शामिल किए जाएं. इसके लिए 45 से 60 अफगानी आतंकियों को इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है.

एक तीर से दो शिकार करने की ISI की रणनीति

सूत्रों का कहना है कि ISI इस हाइब्रिड मॉड्यूल का इस्तेमाल सिर्फ भारत के खिलाफ ही नहीं करना चाहती. नए सिस्टम के तहत जहां अफगानी आतंकियों को भारत में हमलों के लिए तैयार किया जाएगा, वहीं बाकी आतंकियों का इस्तेमाल खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ किया जाएगा. इससे पहले ISI बलूचिस्तान में ISKP के जरिए बलूच लिबरेशन आर्मी और बलूच लिबरेशन फ्रंट जैसे संगठनों को निशाना बनवाती रही है. तिराह घाटी में बना यह ज्वाइंट हेडक्वार्टर ISI के लिए दोहरे फायदे का जरिया बन सकता है.

पाकिस्तानी सेना और ISI के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका

खुफिया सूत्रों के अनुसार यह पूरा ज्वाइंट मॉड्यूल पाकिस्तानी सेना के X कॉर्प्स के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एमर एहसान नवाज और PoK में ISI के सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर फैक अयूब की रणनीति का हिस्सा है. बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के करीब आठ महीने बाद इस योजना को न सिर्फ तैयार किया गया, बल्कि इसे जमीन पर उतार भी दिया गया है.

रावलपिंडी से होगा ऑपरेशन का संचालन

सूत्रों के मुताबिक अफगानी आतंकियों की भारत में घुसपैठ की जिम्मेदारी एक बार फिर रफीक नाई और शमशेर नाई को सौंपी गई है, जो पिछले दो दशकों से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के लिए यह काम करते रहे हैं. वहीं, लश्कर का टॉप कमांडर हुजैफा बक्करवाल रावलपिंडी में बैठकर सैटेलाइट फोन के जरिए इन आतंकियों से संपर्क में रहेगा और ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी देगा.

खैबर जिले में एयरस्ट्राइक और मासूमों की मौत

पिछले एक साल में पाकिस्तानी सेना ने खैबर जिले के पहाड़ी इलाकों में कई हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में 60 से अधिक आम लोगों की मौत हो चुकी है. 22 सितंबर की घटना खास तौर पर चर्चा में रही, जब एक ही दिन में 30 नागरिक मारे गए, जिनमें 9 बच्चे भी शामिल थे. पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि इन हमलों में 35 से ज्यादा आतंकियों को मारा गया और 6 से अधिक ठिकानों को तबाह किया गया, जिन्हें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के अड्डे बताया गया.

वैश्विक समुदाय के सामने उठते सवाल

इन तमाम घटनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. एक तरफ पाकिस्तान एंटी टेरर ऑपरेशन के नाम पर आम नागरिकों की जान ले रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसी इलाके में ISKP और लश्कर-ए-तैयबा का ज्वाइंट हेडक्वार्टर खड़ा किया जा रहा है. दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर कब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को प्रॉक्सी वॉर के तौर पर नई-नई रणनीतियों के जरिए इस्तेमाल करता रहेगा.

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