पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में एक बार फिर तल्ख़ी देखने को मिल रही है. हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने नेशनल असेंबली में तीखा बयान देते हुए अफगानिस्तान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन और देशद्रोही तक करार दे दिया. उनका यह बयान अफगान नागरिकों के बड़े पैमाने पर चल रहे निर्वासन अभियान को लेकर आया है.
अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे
रक्षा मंत्री ने संसद में कहा कि पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के दोहरे रवैये को और सहन करने को तैयार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ अफगानी नागरिक पाकिस्तान में व्यापार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर अफगान सरजमीं से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को शरण दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि हमने अफगान तालिबान से कई बार कहा कि वे टीटीपी को समर्थन देना बंद करें, लेकिन हर प्रयास विफल रहा है. अब हम चुप नहीं बैठेंगे. चाहे आतंकी ठिकाने पाकिस्तान में हों या अफगानिस्तान में, अब हर कोई जवाबदेह होगा. आसिफ ने यह भी जोड़ा कि सेना और सरकार का धैर्य अब समाप्त हो चुका है और अगर ज़रूरत पड़ी तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसका असर हर पक्ष को झेलना होगा.
अफगानिस्तान का पलटवार, पाकिस्तान पर घुसपैठ का आरोप
पाकिस्तान के इस रुख के जवाब में तालिबान सरकार ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. अफगान रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को दावा किया कि पाकिस्तान ने पक्तिका प्रांत के मार्गी इलाके में एक नागरिक बाजार पर हवाई हमला किया है और यह अफगान संप्रभुता का उल्लंघन है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी सेना ने अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए बमबारी की है. यह हमारे खिलाफ एक अभूतपूर्व कदम है. हालांकि बयान में यह साफ़ नहीं किया गया कि काबुल के "संप्रभु क्षेत्र" का उल्लंघन किस प्रकार हुआ, लेकिन एएफपी के संवाददाताओं और स्थानीय नागरिकों ने देर रात भारी विस्फोटों की पुष्टि की है. बताया गया कि एक पुराने हथियारों की दुकान वाले इलाके को निशाना बनाया गया.
बढ़ते तनाव के गंभीर संकेत
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की दीवार अब बुरी तरह दरक चुकी है. जहां पाकिस्तान अफगान सरकार पर आतंकी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगा रहा है, वहीं तालिबान प्रशासन पाकिस्तानी कार्रवाई को सीमापार आक्रामकता बता रहा है. स्थिति अगर इसी तरह बिगड़ती रही, तो दोनों देशों के रिश्तों में खुला टकराव हो सकता है, जिसका असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि लाखों आम नागरिकों के जीवन को भी प्रभावित कर सकता है.
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