जज ने कहा- पीएम शहबाज शरीफ को तलब कर लूंगा, और घंटेभर में ही हो गया तबादला, पाकिस्तान में मचा बवाल!

पाकिस्तान में न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज मोहसिन अख्तर कयानी को अचानक पद से हटा दिया गया, जिसके बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है.

Pakistan High Court Judge summoning Pakistan PM and got transferred
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज मोहसिन अख्तर कयानी को अचानक पद से हटा दिया गया, जिसके बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है.

यह फैसला उस समय आया जब उन्होंने एक सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अदालत में तलब करने की बात कही थी.

सुनवाई के दौरान PM को बुलाने की चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी में वित्तीय सदस्य की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चल रही थी.

इस दौरान जस्टिस कयानी ने सरकार के वकील से नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि 18 मई तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो वह प्रधानमंत्री को अदालत में पेश होने के लिए बुला सकते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि मामले को लंबे समय से टाला जा रहा है और सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं.

एक घंटे के भीतर तबादला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सुनवाई के लगभग एक घंटे बाद ही जस्टिस कयानी का तबादला कर दिया गया. उन्हें इस्लामाबाद हाईकोर्ट से हटाकर लाहौर हाईकोर्ट भेज दिया गया.

सरकार के कानून विभाग ने इसे एक सामान्य प्रशासनिक फैसला बताया है, लेकिन इस तेजी से हुए तबादले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

अन्य जजों के भी हुए ट्रांसफर

इस फैसले के साथ ही दो अन्य जजों के तबादले भी किए गए. जस्टिस बाबर सत्तार को लाहौर से पेशावर हाईकोर्ट भेजा गया, जबकि जस्टिस रफत इम्तियाज को सिंध हाईकोर्ट में तैनात किया गया है.

बताया जा रहा है कि इन जजों ने भी अपने कुछ फैसलों में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे.

ज्यूडिशियल कमीशन में मतभेद

सूत्रों के अनुसार, जस्टिस कयानी के ट्रांसफर को लेकर ज्यूडिशियल कमीशन के सभी सदस्य सहमत नहीं थे. बावजूद इसके, बहुमत के आधार पर प्रस्ताव पारित कर दिया गया और उनका तबादला कर दिया गया.

फिलहाल इस्लामाबाद हाईकोर्ट में उनकी जगह किसी नए जज की नियुक्ति नहीं की गई है.

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है.

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि देश की न्यायपालिका पर सरकार और अन्य संस्थानों का प्रभाव बढ़ रहा है.

वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में भी इस साल की शुरुआत में कहा गया था कि संवैधानिक बदलावों के जरिए न्यायपालिका पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की गई है.

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