Pakistan Fuel Crisis: पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 28 दिन का ईंधन बचा है और देश पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है. दुनिया के दो अहम समुद्री रास्तों, होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब में चल रहे तनाव का असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है.
हालात ऐसे हैं कि शहबाज शरीफ सरकार खर्च कम करने और जनता पर बोझ बढ़ाने वाले फैसले ले रही है. इसी बीच अब फील्ड मार्शल असीम मुनीर के ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क करने की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने ईरान से हूती हमलों को रोकने में मदद की अपील की है.
पाकिस्तान में ‘फ्यूल लॉकडाउन’, सिर्फ 28 दिन का ईंधन!
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. सरकार के पास विदेशी मुद्रा का दबाव है और देश में करीब 28 दिन का ही ईंधन स्टॉक बचा है. ऐसे में शहबाज सरकार ने तेल की खपत कम करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं. आम लोगों पर बोझ बढ़ाते हुए तीन दिनों के अंदर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी की गई. पेट्रोल 3.40 रुपये और डीजल 6.72 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया.
ईंधन बचाने के लिए सरकार ने सरकारी खर्च और कामकाज को लेकर भी कई पाबंदियां लगाई हैं. सरकारी गाड़ियों के ईंधन कोटे में 50 फीसदी कटौती की गई है. नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर रोक लगा दी गई है. सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों की अगले तीन महीने की विदेश यात्राओं पर भी रोक है. बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा की अनुमति होगी और ऐसे मामलों में इकोनॉमी क्लास से सफर करना होगा.
इसके अलावा अस्पतालों और सीएनजी स्टेशनों को छोड़कर दुकानों और बाजारों को रात 9 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया है. सरकारी पैसे से होने वाले डिनर, सेमिनार और दूसरे कार्यक्रमों पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है.
कच्चे तेल की आग, 100 डॉलर के पार पहुंचा भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है. सितंबर में तेल के दाम लगातार ऊपर जाते रहे. 4 सितंबर को कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 9 सितंबर को 101 डॉलर पहुंच गई. 14 सितंबर को यह 109 डॉलर तक गई. इसके बाद 15 सितंबर को 107 डॉलर, 16 सितंबर को 108 डॉलर, 17 सितंबर को 105 डॉलर और 18 सितंबर को करीब 104 डॉलर प्रति बैरल रही.
तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं. पाकिस्तान भी अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए महंगा कच्चा तेल उसके आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है.
जनता से ‘सिंगल डिश’ की अपील, नेताओं की शादी में करोड़ों खर्च
पाकिस्तान में सरकार आम लोगों से खर्च कम करने की अपील कर रही है. शहबाज शरीफ ने शादियों में सिर्फ एक डिश परोसने यानी ‘सिंगल डिश पॉलिसी’ का पालन करने की बात कही है. इसका मकसद खाने और पैसे की बचत करना बताया गया है.
लेकिन इसी बीच पाकिस्तान के राजनीतिक परिवार से जुड़ी एक शादी को लेकर खर्च पर सवाल उठ रहे हैं. 12 सितंबर को नवाज शरीफ की नातिन और मरियम नवाज की बेटी महनूर सफदर की शादी हुई. पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, शादी में काफी पैसा खर्च किया गया. रिपोर्टों में दावा किया गया कि परिवार के खास सदस्यों के कपड़े, घड़ियां, बैग और निजी सामान पर ही करीब 3 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए.
इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार आम लोगों से खर्च घटाने और एक डिश में शादी करने की अपील कर रही है, तब राजनीतिक परिवारों से जुड़े आयोजनों में इतना खर्च कैसे हो रहा है.
मक्का पैक्ट से पीछे हटे मुनीर? ईरान से मांगी मदद
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ ‘मक्का रक्षा समझौता’ किया है. इस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे समूह के बाकी देशों पर हमला माना जाएगा और जरूरत पड़ने पर दूसरे देश सैन्य मदद करेंगे.
इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब की ऊर्जा और तेल से जुड़ी जगहों पर हमलों ने पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ा दी. रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने ऐसे हालात में सीधे सेना भेजने के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाया.
बताया जा रहा है कि असीम मुनीर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की. इस दौरान उन्होंने ईरान से हूती विद्रोहियों पर प्रभाव डालने और सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले रोकने की अपील की. यानी पाकिस्तान के सामने एक तरफ सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ बातचीत करके तनाव कम करने की कोशिश भी करनी पड़ रही है.
UNSC में ईरान के मुद्दे पर पाकिस्तान की दूरी
ईरान से जुड़े एक दूसरे मामले में भी पाकिस्तान की भूमिका चर्चा में रही. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में अमेरिका एक प्रस्ताव लेकर आया था. इसमें ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले यूएन एक्सपर्ट्स का कार्यकाल एक साल बढ़ाने की बात थी.
सुरक्षा परिषद के 15 में से 11 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया. वहीं रूस और चीन ने वीटो का इस्तेमाल करते हुए इसे रोक दिया. इस दौरान पाकिस्तान ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. यानी उसने न तो प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया और न ही विरोध में.
रावलपिंडी में अमेरिकी ड्रोन कंपनी से डील, ईरान पर नजर का दावा
पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी ड्रोन कंपनी PowerUS की एक टीम ने रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान के जीएचक्यू में असीम मुनीर से मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कंपनी के संस्थापक एंड्रयू फॉक्स ने की. रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में पाकिस्तान और कंपनी के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं. इसके तहत AI और आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ाने पर काम किया जाएगा.
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल पाकिस्तान-ईरान सीमा पर निगरानी बढ़ाने के लिए किया जा सकता है. बलूचिस्तान के रास्ते पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 909 किलोमीटर लंबी सीमा है. ऐसे में इस डील को ईरान पर नजर रखने की संभावित कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
क्या है PowerUS?
PowerUS के एक बड़ी होल्डिंग कंपनी के साथ विलय की भी बात सामने आई है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस होल्डिंग कंपनी में डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की हिस्सेदारी है.
कुल मिलाकर पाकिस्तान इस समय आर्थिक और कूटनीतिक, दोनों मोर्चों पर दबाव में है. एक तरफ देश में ईंधन की कमी और महंगे तेल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ उसके रिश्तों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं.
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