पाकिस्तान किसी का सगा नहीं! क्या जनरल आसिम मुनीर की घड़ी ने ली ईरान के सेना प्रमुख बघेरी की जान?

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Pakistan General Asim Munir watch take Iran army chief Bagheri life
Image Source: Social Media

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरानी सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद बघेरी की इजरायली हमले में मौत के बाद अब सबकी नजर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर पर जा टिकी है. वजह? उनकी हालिया ईरान यात्रा और उस दौरान दिया गया एक 'तोहफा' जो अब एक बड़ा संदेह बन चुका है.

वो मुलाकात, जिसकी गूंज अब सुनाई दे रही है

कुछ हफ्ते पहले जनरल आसिम मुनीर ने ईरान का दौरा किया था. ये दौरा शांतिपूर्ण और औपचारिक दिख रहा था — उन्होंने तेहरान में ईरान के जनरल स्टाफ मुख्यालय का दौरा किया, और ईरानी सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद बघेरी से मुलाकात की.

इस मुलाकात में सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सैन्य सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी, लेकिन उस वक्त किसी को अंदाज़ा नहीं था कि ये तस्वीरें और यह दौरा कुछ ही हफ्तों में रहस्य और साज़िश का चेहरा बन जाएंगे.

एक 'खास' घड़ी... जो बन गई जासूसी का शक

इस दौरे के दौरान जनरल मुनीर ने जनरल बघेरी को एक हाई-एंड कलाई घड़ी गिफ्ट की थी. शुरुआत में इसे एक शिष्टाचार भेंट माना गया, लेकिन अब यह घड़ी शक के घेरे में है.

क्या यही घड़ी उनकी मौत की वजह बनी?

सोशल मीडिया पर जो दावे वायरल हो रहे हैं, उनके मुताबिक यह घड़ी महज एक लक्ज़री एक्सेसरी नहीं थी — बल्कि यह एक GPS बीकन से लैस डिवाइस थी.

GPS बीकन ऐसे उपकरण होते हैं जो रीयल-टाइम लोकेशन डेटा भेजने में सक्षम होते हैं. अगर इस घड़ी में वाकई ऐसा कोई ट्रैकिंग सिस्टम मौजूद था, तो इसका मतलब यह हुआ कि जनरल बघेरी की हर गतिविधि – उनकी चाल, बैठकों का समय, ठिकानों की पोजिशन – किसी तीसरे पक्ष के लिए खुली किताब बन गई थी.

इजरायली हमला: महज़ संयोग या सोची-समझी चाल?

घड़ी पहनने के 19 दिन बाद, जनरल बघेरी की मौत इजरायली हवाई हमले में हो गई. संयोग? शायद. लेकिन इस समयरेखा ने सोशल मीडिया को उबाल पर ला दिया है.

अगर यह ट्रैकिंग डिवाइस वाली घड़ी बघेरी के पास थी, तो इससे उनके मूवमेंट को ट्रेस कर पाना किसी उन्नत खुफिया एजेंसी के लिए मुश्किल नहीं रहा होगा. कई एक्सपर्ट्स इसे एक संभावित साइबर-जासूसी या टेक्नोलॉजिकल एसेसिनेशन की शुरुआत मान रहे हैं.

पाकिस्तान-ईरान की चुप्पी और सवालों की आंधी

अब तक न पाकिस्तान की सेना और न ही ईरान सरकार ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान दिया है. यह चुप्पी और भी ज्यादा संदेह पैदा कर रही है.

क्या ईरान ने इस घड़ी की जांच की थी?

क्या पाकिस्तान इस घटना में शामिल है या वह खुद किसी बड़ी साजिश में मोहरा बन गया है? या फिर यह सब सिर्फ एक भ्रम है, जिसे वायरल वीडियो और अफवाहों ने हवा दी है?

अगर आरोप सही हैं, तो नतीजे क्या होंगे?

अगर यह साबित हो जाता है कि पाकिस्तान ने किसी तीसरे देश — विशेष रूप से इजरायल या अमेरिका — की मदद से यह ट्रैकिंग डिवाइस जनरल बघेरी को सौंपा, तो यह ईरान-पाकिस्तान रिश्तों में एक ऐतिहासिक दरार ला सकता है. साथ ही ये घटना भविष्य के राजनयिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट सकती है.

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