PoK में चुनाव के बीच सन्नाटा! कई बूथों पर जीरो वोट, सड़कों पर बड़ी संख्या में सेना तैनात

Pok Election: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में विधानसभा चुनाव को लेकर विरोध की खबरें सामने आई हैं. रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कई इलाकों में लोगों ने मतदान से दूरी बनाई और कुछ मतदान केंद्रों पर एक भी वोट नहीं पड़ा.

Pakistan Eerie silence amidst elections in PoK Claims of zero votes at several polling stations
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Pok Election: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में विधानसभा चुनाव को लेकर विरोध की खबरें सामने आई हैं. रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कई इलाकों में लोगों ने मतदान से दूरी बनाई और कुछ मतदान केंद्रों पर एक भी वोट नहीं पड़ा.

बाग और पुंछ जैसे इलाकों से भी ऐसे दावे सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि कई बूथों पर मतदानकर्मी और सुरक्षाबल पूरे दिन मौजूद रहे, लेकिन वोट डालने के लिए लोग नहीं पहुंचे. कुछ जगहों पर मतदान केंद्र लंबे समय तक खाली नजर आए.

हालांकि, इन दावों को लेकर आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार जरूरी है. अलग-अलग मतदान केंद्रों पर स्थिति एक जैसी नहीं थी और कुछ जगहों पर लोगों ने मतदान भी किया.

कई बूथों पर वोटर का इंतजार करते रहे कर्मचारी

रिपोर्टों के मुताबिक, बाग-2, मलोट और बड़ा बारी जैसे कुछ इलाकों में मतदान केंद्रों पर बहुत कम या शून्य मतदान होने का दावा किया गया है. बताया जा रहा है कि कुछ बूथों पर मतदानकर्मी काफी देर तक मतदाताओं का इंतजार करते रहे. 

लेकिन बड़ी संख्या में लोग वोट डालने के लिए नहीं पहुंचे. कुछ इलाकों में चुनाव के दौरान विरोध प्रदर्शन की भी खबरें हैं. लोगों ने कथित तौर पर काले झंडे दिखाकर चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ नाराजगी जताई.

जेएएसी ने किया था चुनाव के बहिष्कार का आह्वान

चुनाव के बहिष्कार की अपील ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC की ओर से किए जाने की बात कही जा रही है. रिपोर्टों के अनुसार, बाग और पुंछ संभाग के कुछ इलाकों में इस अपील का असर देखने को मिला. 

समर्थकों ने लोगों से मतदान से दूर रहने की अपील की और स्थानीय मुद्दों को लेकर विरोध जताया. हालांकि, पूरे PoK में चुनाव का बहिष्कार हुआ, ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई मतदान केंद्रों पर लोगों ने वोट भी डाले.

तीन बूथों पर जीरो वोट का दावा

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नौ मतदान केंद्रों में से तीन बूथों पर एक भी वोट नहीं पड़ा. इसके अलावा कुछ अन्य बूथों पर भी बेहद कम मतदान होने की बात कही गई है.

लेकिन इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए आधिकारिक चुनाव परिणाम जरूरी हैं. अंतिम मतदान प्रतिशत और बूथवार आंकड़े सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि वास्तव में कितने लोगों ने मतदान से दूरी बनाई.

लोगों में नाराजगी की वजह क्या है?

PoK में विरोध के पीछे कई स्थानीय मुद्दे बताए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद का क्षेत्र की राजनीति और प्रशासन में ज्यादा दखल है. स्थानीय लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर लंबे समय से असंतोष की बातें सामने आती रही हैं. 

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्थानीय जनता की मांगों और समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता. इसके अलावा रिफ्यूजी सीटों को लेकर भी कुछ स्थानीय समूहों में नाराजगी बताई जा रही है. इन मुद्दों को लेकर चुनाव बहिष्कार की अपील को समर्थन मिलने का दावा किया गया है.

पाकिस्तान सरकार और सेना पर भी उठ रहे सवाल

विरोध के बीच पाकिस्तान सरकार और सेना की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि क्षेत्र के फैसलों में स्थानीय लोगों की भूमिका सीमित है. भारतीय सूत्रों के हवाले से भी दावा किया गया है कि चुनाव से दूरी और विरोध प्रदर्शन इस्लामाबाद के नियंत्रण को लेकर बढ़ती नाराजगी का संकेत हैं.

हालांकि, इन दावों को लेकर सावधानी जरूरी है. अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं. इसलिए चुनाव का आधिकारिक मतदान प्रतिशत और बूथवार आंकड़े आने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर साफ होगी. फिलहाल इतना जरूर है कि PoK के कुछ इलाकों में चुनाव को लेकर विरोध और बहिष्कार की खबरों ने पाकिस्तान के सामने स्थानीय असंतोष का मुद्दा फिर खड़ा कर दिया है.

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