रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विशाखापत्तनम स्थित मिनीरत्न डिफेंस PSU हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में 300 टन क्षमता वाली गोलियथ क्रेन और अपग्रेडेड स्लिपवे-4 का उद्घाटन किया. इस नई क्रेन और अपग्रेडेड स्लिपवे की मदद से HSL अब पहले से बड़े और ज्यादा जटिल जहाज बनाने में सक्षम होगा.
यह गोलियथ क्रेन हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के दो स्लिपवे के ऊपर स्थापित की गई है और इसकी क्षमता 300 टन तक का भार उठाने की है. इसे मेक इन इंडिया पहल के तहत L&T Geostructure ने Konecranes के साथ मिलकर तैयार किया है. शिपयार्ड के अनुसार, इससे भारी जहाज के हिस्सों यानी ब्लॉक्स को ज्यादा तेजी और सटीकता के साथ उठाने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद मिलेगी.
राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि अपग्रेडेड स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाली गोलियथ क्रेन के साथ HSL अब बड़े और ज्यादा जटिल जहाज बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
दो स्लिपवे के ऊपर काम करेगी एक क्रेन
नई गोलियथ क्रेन स्लिपवे-3 और स्लिपवे-4 दोनों को कवर करती है. यानी एक ही क्रेन शिपयार्ड के दो स्लिपवे के ऊपर काम कर सकती है. इसमें PLC कंट्रोल और Variable Frequency Drives जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
इसके अलावा क्रेन में टैंडम लिफ्टिंग, रिमोट डायग्नोस्टिक्स और कंडीशन मॉनिटरिंग की सुविधा भी है. इन तकनीकों की मदद से जहाज के भारी हिस्सों को तेजी और ज्यादा सटीकता के साथ संभाला जा सकेगा. जहाज बनाने की प्रक्रिया में बड़े-बड़े हिस्सों को अलग-अलग तैयार करके बाद में उन्हें जोड़कर पूरा जहाज बनाया जाता है. इन्हीं बड़े हिस्सों को ब्लॉक कहा जाता है.
बड़े जहाज बनाने के लिए तैयार हुआ स्लिपवे-4
राजनाथ सिंह ने इसी कार्यक्रम में अपग्रेडेड स्लिपवे-4 का भी उद्घाटन किया. इसकी लंबाई बढ़ाई गई है और इसकी भार उठाने की क्षमता को भी बेहतर किया गया है. अब इस स्लिपवे पर 45,000 डेडवेट टन (DWT) तक के जहाज बनाए और लॉन्च किए जा सकते हैं. HSL ने नए स्लिपवे और 300 टन की क्रेन को बड़े जहाज बनाने की अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है.
मेक इन इंडिया पर जोर
HSL ने नई क्रेन के निर्माण में मेक इन इंडिया पर खास जोर दिया है. इसे L&T Geostructure ने Konecranes के साथ मिलकर तैयार किया है. शिपयार्ड अपने जहाज निर्माण कार्यक्रम में भी स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दे रहा है. भारतीय नौसेना के लिए HSL द्वारा बनाए जा रहे फ्लीट सपोर्ट शिप भी देश में ही डिजाइन और तैयार किए जा रहे हैं.
जुलाई 2025 में नौसेना में शामिल INS Nistar भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल है. HSL के मुताबिक, इसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है.
राजनाथ सिंह ने इन उपलब्धियों को आत्मनिर्भर भारत से जोड़ते हुए कहा कि FSS-1 का लॉन्च और FSS-5 की कील रखना इस बात का संकेत है कि आत्मनिर्भरता अब जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र में स्टील के रूप में आकार ले रही है. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की पहुंच और क्षमता बढ़ेगी. HSL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रियर एडमिरल सी. रघुराम (रिटायर्ड) ने कहा कि मंगलवार को हुए ये कार्यक्रम HSL के कर्मचारियों की मेहनत, भारतीय नौसेना के भरोसे और उसके बिजनेस पार्टनर्स के सहयोग का नतीजा हैं.
नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं पांच फ्लीट सपोर्ट शिप
HSL इस समय भारतीय नौसेना के लिए पांच फ्लीट सपोर्ट शिप बना रहा है. इनमें से प्रत्येक जहाज का वजन करीब 43,500 टन है. इन जहाजों का मुख्य काम समुद्र में तैनात युद्धपोतों को जरूरी सामान और अन्य सहायता उपलब्ध कराना होगा. इन जहाजों की मदद से भारतीय नौसेना के युद्धपोत लंबे समय तक समुद्र में अपनी तैनाती जारी रख सकेंगे. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता और पहुंच बढ़ेगी.
मंगलवार को राजनाथ सिंह ने पहले फ्लीट सपोर्ट शिप FSS-1 को लॉन्च किया. इसके लिए 18 महीने पहले स्टील कटिंग की गई थी. इसके साथ ही उन्होंने पांचवें जहाज FSS-5 की कील भी रखी. HSL के मुताबिक, ये दोनों कार्यक्रम इस सीरीज के जहाजों के बड़े स्तर पर निर्माण की दिशा में लगातार आगे बढ़ने को दिखाते हैं.
रियर एडमिरल सी. रघुराम ने कहा कि बेहतर हो चुकी आधारभूत सुविधाओं और फ्लीट सपोर्ट शिप कार्यक्रम के तेजी से आगे बढ़ने के साथ HSL देश और दुनिया के लिए अगली पीढ़ी के जहाज बनाने के लिए तैयार है.
HSL लगातार बढ़ा रहा है अपनी क्षमता
यह उद्घाटन ऐसे समय हुआ है जब HSL ने वित्त वर्ष 2025-26 को अपना अब तक का सबसे अच्छा साल बताया है. इस दौरान शिपयार्ड का उत्पादन मूल्य 1,969 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 34 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, HSL की कुल आय 29 प्रतिशत बढ़कर 2,295 करोड़ रुपये हो गई. रियर एडमिरल रघुराम ने कहा कि HSL देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है.
शिपयार्ड के अनुसार, मंगलवार को हुए ये कार्यक्रम उसे एक आधुनिक, भविष्य के लिए तैयार और हर तरह के जहाज बनाने में सक्षम शिपबिल्डर के रूप में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. राजनाथ सिंह ने HSL को भारत की समुद्री ताकत का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया. कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और विशाखापत्तनम से सांसद श्रीभरत मथुकुमिल्ली भी मौजूद रहे.
1941 में हुई थी HSL की स्थापना
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की स्थापना 1941 में हुई थी. यह रक्षा मंत्रालय के अधीन मिनीरत्न कैटेगरी-I डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग है. आजादी के बाद भारत में बनाया गया पहला जहाज 'जला उषा' भी HSL ने ही तैयार किया था. इसे 1948 में लॉन्च किया गया था.
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