Taliban Rejects Khawaja Asif Visa: दक्षिण एशिया के दो प्रमुख पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब कूटनीतिक रिश्तों पर भी गहरा असर डाल रहा है. हाल ही में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ, ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद आसिम मलिक और दो अन्य शीर्ष सैन्य अधिकारियों के वीजा अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है.
इस कदम ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और भड़का दिया है. वीजा इनकार केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि तालिबान की तरफ से पाकिस्तान को एक सख्त राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.
क्यों तालिबान ने पाक अधिकारियों के वीजा नहीं दिए?
तालिबान प्रशासन के अनुसार, यह फैसला सीमा पर हालिया पाकिस्तानी हवाई हमलों और आक्रामक सैन्य गतिविधियों की प्रतिक्रिया में लिया गया है. अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने स्पष्ट कहा कि जब अफगानी नागरिकों पर बमबारी हो रही हो, उस वक्त किसी भी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करना संभव नहीं है.
तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में आम नागरिकों के इलाकों पर एयर स्ट्राइक की, जिसमें निर्दोष लोगों की जानें गईं और अफगान एयरस्पेस का उल्लंघन भी हुआ. इस संदर्भ में तालिबान ने साफ किया कि वे पाकिस्तान से केवल अपनी शर्तों पर बातचीत करेंगे.
तीन अलग-अलग वीजा आवेदन, तीनों अस्वीकृत
TOLO News की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से तीन अलग-अलग वीजा अनुरोध भेजे गए थे, जिनमें रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ, ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद आसिम मलिक और दो अन्य पाकिस्तानी जनरल शामिल थे. तालिबान सरकार ने इन सभी को खारिज कर दिया, यह संकेत देते हुए कि वे अब पाकिस्तान के साथ पूर्व की तरह सहज संबंध नहीं रखेंगे.
सऊदी, कतर और UAE की मध्यस्थता
बढ़ते टकराव के बीच सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मध्यस्थता की पहल की है. अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी ने कहा कि इन तीनों देशों ने अफगानिस्तान से अपील की कि लड़ाई बंद की जाए, जिस पर तालिबान सहमत हुआ. यह दिखाता है कि तालिबान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीतिक रूप से भी सक्रिय हो चुका है और केवल पाकिस्तान की बात मानने को तैयार नहीं.
पाकिस्तान की ओर से क्या दावा?
पाकिस्तानी सेना ने एक बयान जारी कर बताया कि अफगान सीमा पर रातभर हुई झड़पों में उसके 23 सैनिक मारे गए और तालिबान से जुड़े 200 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया. यह दावा स्पष्ट करता है कि सीमा पर टकराव केवल सीमित झड़प नहीं, बल्कि गंभीर सैन्य कार्रवाई का रूप ले चुका है.
तालिबान का पलटवार: ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को हुआ
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने पाकिस्तानी दावों को खारिज करते हुए दावा किया कि वास्तव में 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि लगभग 30 घायल हुए हैं. यह बयान पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहज करने वाला है, क्योंकि यह एक पड़ोसी देश की ओर से खुलेआम सैन्य नुक़सान का दावा है.
चीन की प्रतिक्रिया: संयम और शांति की अपील
इस पूरे विवाद पर चीन ने चिंता व्यक्त की है. चीनी विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों से आग्रह किया कि वे संयम बरतें और आपसी समस्याओं को बातचीत से सुलझाएं. साथ ही चीन ने अनुरोध किया है कि दोनों पक्ष चीन के नागरिकों, परियोजनाओं और संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो कि चीन की अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों में मौजूद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं से जुड़ा है. चीन का बयान यह दर्शाता है कि वह क्षेत्र में स्थिरता चाहता है क्योंकि उसका निवेश और रणनीतिक प्रभाव दोनों ही खतरे में पड़ सकते हैं.
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