जिसने कश्मीर में फैलाया आतंक, उसके लिए आंसू बहा रहा पाकिस्तान, शहबाज सरकार ने बताया बेकसूर

Pakistan on Yasin Malik: पाकिस्तान सरकार ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ भारत में चल रहे मामलों को राजनीतिक बताया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यासीन मलिक पर राजनीति से प्रेरित होकर मुकदमा चलाया गया और उसे सजा देना भी गलत है.

Pakistan comes support of Yasin Malik ongoing cases in India politically motivated
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Pakistan on Yasin Malik: पाकिस्तान सरकार ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक के खिलाफ भारत में चल रहे मामलों को राजनीतिक बताया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यासीन मलिक पर राजनीति से प्रेरित होकर मुकदमा चलाया गया और उसे सजा देना भी गलत है.

पाकिस्तान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है, जब तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक ने 36 साल पहले कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या में अपनी भूमिका से इनकार किया है. मलिक ने श्रीनगर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (टाडा/पोटा) अदालत में 25 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

पाकिस्तान ने कहा- यासीन के साथ हुआ गलत

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से भारत में यासीन मलिक के खिलाफ चल रहे मुकदमों को लेकर सवाल पूछा गया. इस पर उन्होंने कहा कि मलिक के खिलाफ की गई कार्रवाई न्याय की बुनियादी जरूरतों के खिलाफ है. उन्होंने दावा किया कि यासीन मलिक पर मुकदमा और उसे दी गई सजा पूरी तरह राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी.

प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर यासीन मलिक का मामला उठाता रहेगा. उन्होंने मलिक की अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले पर ध्यान देने की अपील भी की. पाकिस्तान का कहना है कि यासीन मलिक के साथ गलत हुआ है.

यासीन मलिक ने क्या कहा?

अपने हलफनामे में यासीन मलिक ने कहा कि 29 जून को जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने 19 अप्रैल 1990 को सरला भट की हत्या के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया. 

मलिक ने कहा कि उसे इस बात पर हैरानी हुई कि घटना के करीब तीन दशक बाद उसे आरोपियों में शामिल किया गया. मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया. उसका कहना है कि जिस समय सरला भट की हत्या हुई, उस समय वह खुद गंभीर हालत में था.

‘मैं उस समय कोमा में था’

यासीन मलिक ने अपने हलफनामे में दावा किया कि अभियोजन पक्ष के अनुसार उसने 19 अप्रैल 1990 को सरला भट की हत्या का आदेश दिया था. लेकिन उसके मुताबिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 8 अप्रैल 1990 को उसे जानलेवा चोटें लगी थीं और वह कोमा में चला गया था.

मलिक ने कहा कि उस समय उसकी मौत की खबर भी फैल गई थी और उसे दो बार मृत घोषित किया गया था. ऐसे में उसका सवाल है कि जब वह खुद कोमा में था तो वह किसी हत्या की योजना कैसे बना सकता था.

कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के करीब 36 साल बाद इस साल जून में एसआईए ने श्रीनगर की विशेष टाडा अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था. इसमें प्रतिबंधित जेकेएलएफ के प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक, जो उस समय संगठन का ‘चीफ कमांडर’ था, और खुर्शीद अहमद चाल्कू को इस मामले का मास्टरमाइंड बताया गया है.

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