नई दिल्लीः भारत की वायु सीमाएं अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होने जा रही हैं. आने वाले समय में भारतीय वायुसेना को वो ताकत मिलने वाली है, जो दुश्मन की सरहद के भीतर तक आंख बनकर देखेगी — और ज़रूरत पड़ी तो हमला भी करेगी. इस मिशन का नाम है: I-STAR — यानी Intelligence, Surveillance, Target Acquisition and Reconnaissance.
क्यों खास है I-STAR विमान?
I-STAR एक हाईटेक जासूसी और टारगेटिंग एयरक्राफ्ट होगा, जो ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन की जमीनी हरकतों पर बारीकी से नजर रखेगा. सिर्फ नज़र ही नहीं रखेगा, बल्कि खतरे की पहचान कर उससे पहले हमला करने की क्षमता भी रखेगा. इसे भारत की ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक कैपेबिलिटी’ को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
चीन-पाकिस्तान के गठजोड़ से बढ़ी चुनौती
पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और चीन की वायुसेना के बीच मिलिट्री एक्सरसाइज ने भारत के लिए चिंता बढ़ाई है. मई में पाकिस्तान ने चीन के फाइटर जेट्स की मदद से भारतीय सीमा के पास आक्रामक उड़ानें भरीं. ऐसे में भारत के लिए जरूरी हो गया था कि वह अपनी एयर सर्विलांस और रीकॉन क्षमताओं को अपग्रेड करे.
देसी तकनीक और विदेशी प्लेटफॉर्म का मेल
भारत तीन I-STAR एयरक्राफ्ट खरीदने की तैयारी में है. इसके लिए अमेरिकी कंपनी Boeing और कनाडा की Bombardier से बातचीत चल रही है. ये डील लगभग ₹10,000 करोड़ यानी करीब 1.2 बिलियन डॉलर की होगी. खास बात यह है कि इन विमानों में जो रडार और सर्विलांस सिस्टम होंगे, वे भारत में ही बनाए जाएंगे. DRDO के Centre for Airborne Systems (CABS) ने ये आधुनिक सेंसर तैयार किए हैं, जो दुश्मन के रडार, मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड सेंटर को सटीक पहचान सकते हैं.
तेजी से हो रहा है वायुसेना का आधुनिकीकरण
I-STAR प्रोजेक्ट के अलावा भी भारत ने हाल के दिनों में अपनी वायुसेना को हाईटेक बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं:
एक कदम आगे की तैयारी
भारत अब सिर्फ बचाव की नहीं, बल्कि जवाबी रणनीति की ओर भी बढ़ रहा है — वो भी टेक्नोलॉजी के दम पर. I-STAR जैसे एडवांस जेट भारत को एक ऐसी आंख देंगे जो 24x7 दुश्मन पर नज़र रख सकेगी — और जो जरूरत पड़ी तो वो आंख मिसाइल भी बन सकती है.
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