नई दिल्ली: भारत में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चेतावनी दी है. पर्यावरण थिंक टैंक काउंसिल फॉर एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के अनुसार, आने वाले लगभग 20 वर्षों में देश को हर साल औसतन 15 से 40 अतिरिक्त अत्यधिक गर्म दिनों का सामना करना पड़ सकता है, जब तापमान सामान्य स्तर से काफी ऊपर रहेगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलाव केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ेगा.
हर साल बढ़ेंगे ‘हीट डे’, सामान्य से ज्यादा गर्मी
CEEW की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गर्मी के दिनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है. आने वाले समय में कई राज्यों में हर साल 15 से 40 दिन ऐसे हो सकते हैं, जब तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहेगा.
इस बढ़ती गर्मी से लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो सकती है और हीट स्ट्रेस जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ने की आशंका जताई गई है.
सिर्फ दिन नहीं, रातें भी होंगी ज्यादा गर्म
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि समस्या केवल दिन की गर्मी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रातें भी पहले की तुलना में अधिक गर्म होंगी.
कई क्षेत्रों में हर साल 20 से 40 दिन तक असामान्य रूप से गर्म रातें देखने को मिल सकती हैं. इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि शरीर को पर्याप्त ठंडक नहीं मिल पाएगी, जिससे लोगों की सेहत पर दबाव बढ़ेगा और रिकवरी मुश्किल हो जाएगी.
इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर
CEEW की रिपोर्ट के अनुसार कुछ राज्यों में गर्मी के साथ-साथ बारिश के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
इन राज्यों में आने वाले वर्षों में 10 से 30 अतिरिक्त दिनों तक गर्मी और भारी बारिश दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है. इससे न सिर्फ लोगों की सेहत पर असर पड़ेगा, बल्कि कामकाज की क्षमता और बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बढ़ेगा.
डेटा और तकनीक से तैयार किए गए अनुमान
यह आकलन CRAVIS (Climate Resilience Analytics and Visualisation Intelligence System) के विश्लेषण पर आधारित है, जो एक AI-संचालित जलवायु इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है.
यह सिस्टम भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और भारतीय वन सर्वेक्षण जैसे संस्थानों से मिले 40 वर्षों से अधिक के जलवायु डेटा का विश्लेषण करता है. इसी आधार पर यह प्लेटफॉर्म वर्ष 2070 तक के जलवायु अनुमान तैयार करने में सक्षम है.
डेटा सेंटर और अर्थव्यवस्था पर असर
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि बढ़ती गर्मी का असर डिजिटल और तकनीकी ढांचे पर भी पड़ेगा.
भारत में मौजूद लगभग 281 डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ेगी. जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, कूलिंग सिस्टम पर दबाव भी बढ़ेगा, जिससे इन केंद्रों का ऑपरेटिंग खर्च बढ़ सकता है.
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
लगातार बढ़ती गर्मी और गर्म रातें शरीर को पर्याप्त आराम नहीं देने देतीं. इससे हीट स्ट्रेस, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तापमान का यह ट्रेंड जारी रहा तो इसका असर न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर बल्कि देश की उत्पादकता और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिलेगा.
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