बीते 24 घंटे में अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा पर हुई दो अहम घटनाओं ने इस्लामाबाद की चिंता बढ़ा दी है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, करीब 250 तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकी बाजौर इलाके में दाखिल हो चुके हैं. यह वही इलाका है, जो पहले से ही हिंसा और आतंक की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है.
घुसपैठ की खबर के तुरंत बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने बॉर्डर से सटे पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं. जिन इलाकों में इंटरनेट बैन किया गया है, वे टीटीपी के प्रभाव वाले माने जाते हैं और पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं.
क्यों बढ़ी पाकिस्तान की चिंता?
1. बाजौर में आतंकियों की मौजूदगी से सुरक्षा बलों पर खतरा
बाजौर, पाकिस्तान के अशांत इलाकों में गिना जाता है, जहां टीटीपी लंबे समय से सक्रिय है. खुफिया इनपुट के अनुसार, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की पहली रणनीति खैबर और इसके आसपास के इलाकों पर नियंत्रण जमाने की है. 2025 के शुरुआती आठ महीनों में टीटीपी ने पाकिस्तान में 700 से ज्यादा हमले किए हैं, जिनमें 256 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. आतंकियों की रणनीति अब सीधी टक्कर की है—वे पुलिस और सेना के काफिलों को सीधे निशाना बना रहे हैं. ऐसे में बाजौर जैसे सीमावर्ती इलाके में 250 आतंकियों की मौजूदगी पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी है.
2. अफगानिस्तान की ओर से इंटरनेट बैन की कार्रवाई
तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान सीमा से लगे जिन पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद की हैं, वहां टीटीपी की उपस्थिति मानी जाती है. माना जा रहा है कि यह कदम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की ओर से की जा रही डिजिटल ट्रैकिंग और संभावित हमलों को रोकने के लिए उठाया गया है. इससे पहले पाकिस्तान की एजेंसियां इन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट डेटा के जरिए आतंकियों की गतिविधियों का पता लगा रही थीं. लेकिन अब इंटरनेट बैन से यह रास्ता भी बंद हो गया है. अफगानिस्तान ने भले ही इसकी कोई आधिकारिक वजह बताई हो, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की गतिविधियों पर पलटवार मान रहे हैं.
मौलवी हक्कानी का फतवा: नया मोर्चा खोलने की कोशिश?
इन घटनाओं से ठीक दो दिन पहले, अफगानिस्तान के एक प्रभावशाली मौलवी मोहम्मद नसीम हक्कानी ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जिहाद का फतवा जारी किया था. इस बयान ने पहले ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया था, और अब आतंकी गतिविधियों में तेजी आने से हालात और बिगड़ने की आशंका है.
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान: संगठन की हकीकत
टीटीपी एक कट्टरपंथी आतंकी संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान में शरीयत पर आधारित शासन स्थापित करना है. इस संगठन के पास अनुमानित 6000 से अधिक प्रशिक्षित लड़ाके हैं और यह पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा क्षेत्र में दो प्रमुख ट्रेनिंग कैंप चला रहा है. पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी को अफगानिस्तान से हथियार और पनाह मिल रही है. हालांकि तालिबान सरकार इन दावों को खारिज करती है.
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