Hyderabad Lok Sabha Seat
नई दिल्ली: पहले चरण में 19 अप्रैल को देशभर के 102 संसदीय सीटों पर हुए वोटिंग के बाद देश में चुनावी रंग और गहरा होता जा रहा है. अपने सीट पर जीत हासिल करने के लिए प्रत्याशी तरह-तरह योजनाएं बना रहे हैं. इसी बीच बहुचर्चित सीट हैदराबाद (Hyderabad) पर सभी की निगाहें हैं. हैदराबाद लोकसभा (Lok Sabha) सीट पर इस बार एक दिलचस्प मुकाबले में ओवैसी ब्रदर्स आमने-सामने हैं. इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या ओवैसी भाइयों के बीच फूट पैदा हो गई है या फिर इसके पीछे कुछ राजनीति है?
दरअसल ये AIMIM ( All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का संसदीय सीट हैं. ये सीट हमेशा से ओवैसी परिवार का गढ़ माना जाता है. पिछले 10 बार से अधिक समय से इस सीट पर ओवैसी परिवार का कब्जा रहा है. इस बार भी असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने इस सीट से अपना नामांकन किया है, हालांकि चौंकाने वाली बात ये है कि इसी सीट से उनके भाई अकबरदुद्दीन ओवैसी (Akbaruddin Owaisi) ने भी पर्चा दाखिल किया है, जो एक दिन पहले तक अपने भाई और पार्टी प्रत्याशी असदुद्दीन ओवैसी के लिए प्रचार करते हुए नजर आ रहे हैं. उनके पार्टी के समर्थक समेत कई लोग ये सोच रहे होंगे कि अकबरदुद्दीन अचानक बागी क्यों हो गए और अपने ही भाई असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के खिलाफ पर्चा क्यों दाखिल कर दिया, लेकिन स्पष्ट कर दें कि अकबरुद्दीन ने वैकल्पिक उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है. आइए समझते हैं क्या है इसका मतलब.
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हैदराबाद सीट पर ओवैसी ब्रदर्स के आमने-सामने होने का असल कारण
बता दें एआईएमआईएम (AIMIM) ने हैदराबाद सीट से बैकअप प्रत्याशी का इस्तेमाल किया है. दरअसल अकबरुद्दीन ओवैसी वर्तमान में चंद्रायनगुट्टा से विधायक हैं और इन्होंने हैदराबाद लोकसभा सीट से पर्चा दाखिल किया है. इसी सीट से पार्टी चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी नामांकित है. ऐसे में कई लोगों को लग रहा है कि हैदराबाद सीट से ओवैसी ब्रदर्स आमने सामने हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. अकबरदुद्दीन ने बैकअप उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया है, ऐसा तब किया जाता है. जब पार्टी को अपने प्रत्याशी की नामांकन प्रक्रिया में कोई जोखिम न लेना हो. इससे फायदा यह होता है कि अगर आगे किसी कारणवश या फिर छोटी सी गलती या भूल के कारण अगर नामांकन रद्द किया जाता है, तो पार्टी के पास दूसरा प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उपलब्ध होता है. लेकिन अगर मूल उम्मीदवार की नामांकन स्वीकार्य की जाती है, तो वैकल्पिक उम्मीदवार स्वतः ही अपना नाम वापस ले लेता है.
चंद्रायनगुट्टा सीट पर अकबरुद्दीन के खिलाफ बेटे ने भरा था पर्चा
इससे पहले ठीक ऐसा ही केस चंद्रायनगुट्टा सीट पर देखने को मिला था. जब तेलंगाना विधानसभा चुनाव में चंद्रायनगुट्टा सीट से अकबरुद्दीन ओवैसी ने नामांकन किया था. इसी सीट से उनके बेट नूर उद्दीन औवेसी ने बी नामांकन किया. लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था. ठीक इसी से मिलता-जुलता ताजा उदाहरण सूरत में देखने को मिला. यहां पर कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने के बाद बाकी के 8 उम्मीदवार भी अपने नाम वापस ले लिए और इस सीट से बीजेपी के मुकेश दलाल की निर्विरोध जीत हुई.
हैदराबाद में 1984 से जीतती आ रहा ओवैसी परिवार
गौरतलब है कि हैदराबाद की सीट शुरुआत से ओवैसी परिवार की गढ़ मानी जाती है. यहां पर मुसलमानों की संख्या 60 फिसदी है, जबकि हिंदुओं की संख्या यहां पर 40 प्रतिशत है. यहां से एआईएमआईएम लगातार 1984 से जीतते आ रही है. पहले इस सीट पर ओवैसी के पिता दिवंगत सलाहुद्दीन ओवैसी साल 1984 से 1999 तक लगातार 6 चुनाव जीते हैं. वहीं इससे बाद साल 2004 से 2019 तक ओवैसी ने इस सीट से जीत दर्ज की है. 10 बार से लगातार इस सीट पर ओवैसी परिवार का कब्जा रहा है. बीजेपी ने इस बार हैदराबाद सीट से माधवी लता को मैदान में उतारा है, जो काफी चर्चाओं में रही हैं.
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