H1N1 Cautions: पिछले कुछ दिनों में H1N1 और फ्लू के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं. अस्पतालों और ओपीडी में बुखार, खांसी, गले में दर्द और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है. इससे लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है.
लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि H1N1 कोई नया वायरस नहीं है. यह इंफ्लूएंजा ए का ही एक प्रकार है और अब सामान्य मौसमी फ्लू का हिस्सा बन चुका है. ज्यादातर लोगों में यह बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है. इसलिए हर बुखार या H1N1 के हर मामले में घबराने की जरूरत नहीं है.
हालांकि, सभी लोगों के लिए इसका खतरा एक जैसा नहीं होता. एक स्वस्थ 25 साल के युवक और 70 साल के ऐसे बुजुर्ग को एक जैसा फ्लू हो सकता है, जिसे डायबिटीज, दिल की बीमारी और सीओपीडी जैसी समस्याएं हों. लेकिन दोनों में बीमारी का खतरा काफी अलग हो सकता है.
बुजुर्गों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
65 साल से अधिक उम्र के लोगों में इंफ्लूएंजा को हल्के में नहीं लेना चाहिए. खासकर अगर उन्हें पहले से डायबिटीज, दिल की बीमारी, किडनी की बीमारी, अस्थमा या सीओपीडी जैसी कोई समस्या है.
बुजुर्गों में कई बार बहुत तेज बुखार नहीं आता. परिवार को लगता है कि कमजोरी या सुस्ती उम्र की वजह से है. लेकिन अगर अचानक कमजोरी बहुत बढ़ जाए, सांस लेने में परेशानी हो, खाना-पीना कम हो जाए या मरीज उलझन में नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
छोटे बच्चों पर भी रखें नजर
पांच साल से कम उम्र के बच्चों और खासकर दो साल से छोटे बच्चों में फ्लू कभी-कभी तेजी से गंभीर हो सकता है. अगर बच्चे को बुखार और खांसी है, लेकिन वह खेल रहा है, पानी पी रहा है और सामान्य तरीके से सांस ले रहा है तो आमतौर पर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं होती.
लेकिन अगर बच्चा बहुत सुस्त हो जाए, दूध या पानी पीना बंद कर दे, बार-बार उल्टी करे या बहुत तेजी से सांस लेने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. बच्चों में सिर्फ तापमान देखना काफी नहीं है. उनका व्यवहार और सांस लेने का तरीका भी ध्यान से देखना जरूरी है.
पहले से बीमार लोगों को ज्यादा खतरा
जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर या लंबे समय की बीमारी है, उन्हें फ्लू के दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए. डायबिटीज में संक्रमण के दौरान ब्लड शुगर बढ़ सकता है. अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों में सांस की परेशानी बढ़ सकती है. दिल की बीमारी वाले मरीजों के शरीर पर फ्लू का अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
किडनी या लिवर की बीमारी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी जटिलताओं का खतरा ज्यादा रहता है. कैंसर का इलाज या कीमोथेरेपी करा रहे लोगों और लंबे समय से स्टेरॉयड या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाली दवाएं ले रहे मरीजों को भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों को फ्लू जैसे लक्षण होने पर कई दिन घर पर इंतजार करने के बजाय जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
गर्भवती महिलाएं भी रहें सावधान
गर्भावस्था के दौरान शरीर और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कई बदलाव होते हैं. ऐसे में इंफ्लूएंजा से परेशानी बढ़ने का खतरा सामान्य से ज्यादा हो सकता है. अगर गर्भवती महिला को बुखार, खांसी, शरीर में दर्द या सांस से जुड़ी परेशानी हो तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
हर H1N1 मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं होती. ज्यादातर मरीज आराम, पर्याप्त पानी और लक्षणों के हिसाब से इलाज से ठीक हो जाते हैं. लेकिन सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा सुस्ती या उलझन, पानी न पी पाना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
ठीक होने के बाद अगर अचानक फिर तेज बुखार और खांसी शुरू हो जाए तो भी डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. अगर मरीज पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो लक्षण बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए.
खुद से एंटीबायोटिक न लें
फ्लू एक वायरल संक्रमण है, इसलिए एंटीबायोटिक वायरस पर काम नहीं करती. इसके बावजूद कई लोग बुखार और खांसी होते ही खुद से एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं. एंटीबायोटिक की जरूरत तभी हो सकती है जब साथ में बैक्टीरिया का संक्रमण हो. इसका फैसला डॉक्टर ही कर सकते हैं.
कुछ ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में एंटीवायरल दवाओं की जरूरत पड़ सकती है. इनका फायदा बीमारी की शुरुआत में ज्यादा होता है, इसलिए ऐसे मरीजों को लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
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