PM Modi Speech on Obesity: जब देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से बोलते हैं, तो केवल राजनीतिक घोषणाएं ही नहीं होतीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले संदेश भी दिए जाते हैं. 15 अगस्त 2025 को 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ तिरंगा फहराया, बल्कि लोगों को एक गंभीर स्वास्थ्य संकट के प्रति आगाह भी किया, मोटापा.
जी हां, इस बार भाषण में उन्होंने रोजमर्रा की थाली से जुड़ा ऐसा मुद्दा उठाया, जो देश के करोड़ों लोगों की सेहत से जुड़ा है. उनका कहना था, “मोटापा अब देश के लिए एक बड़ा संकट बनता जा रहा है.” विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 2022 में दुनिया के हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे की चपेट में था. भारत भी इससे अछूता नहीं है.
पीएम मोदी ने चिंता जताई कि हमारे देश में हर तीसरा व्यक्ति मोटापे से जूझ रहा है, और यह आंकड़ा केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी चिंता का विषय है. मोटापा सिर्फ "वजन" नहीं होता, यह एक ऐसा बोझ है जो दिल की बीमारियों, डायबिटीज, हाई बीपी, थाइरॉइड और यहां तक कि जोड़ों की समस्याओं तक को न्योता देता है.
"खाने में तेल कम करें"
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में खासतौर पर लोगों से खाने में तेल का इस्तेमाल कम करने की अपील की. उन्होंने कहा, “अगर आप अपनी सेहत से प्यार करते हैं, तो खाने में तेल का उपयोग 10% कम कर दीजिए.” ये सलाह सिर्फ एक सामान्य सुझाव नहीं है, बल्कि एक ठोस कदम है, उस मोटापे के खिलाफ जो हमारी थाली से शुरू होकर अस्पताल के बिस्तर तक पहुंचा देता है.
वजन बढ़ने के सबसे बड़े कारण
अधिकतर पैकेज्ड फूड्स, फ्राइड स्नैक्स और स्ट्रीट फूड में ट्रांस फैट और अत्यधिक तेल मौजूद होता है. तेल में मौजूद हाई कैलोरीज़ और अनहेल्दी फैट शरीर में चर्बी के रूप में जमा हो जाते हैं. यह सीधा असर डालता है कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और हार्ट हेल्थ पर.
कुछ छोटे लेकिन असरदार कदम
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