यह छात्र आंदोलन नहीं, आतंकी हमला था... शेख हसीना ने अमेरिका और पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप

Sheikh Hasina Allegations: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से चुप्पी तोड़ी है. सत्ता से बेदखल होने और तख्तापलट के महीनों बाद उन्होंने कहा कि पिछले साल बांग्लादेश में हुआ छात्र आंदोलन वास्तव में एक “विदेशी षड्यंत्र” था, जिसे अमेरिका ने योजना बनाकर और पाकिस्तान ने अंजाम देकर उन्हें सत्ता से हटाने के लिए रचा था.

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Sheikh Hasina Allegations: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश छोड़ने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से चुप्पी तोड़ी है. सत्ता से बेदखल होने और तख्तापलट के महीनों बाद उन्होंने कहा कि पिछले साल बांग्लादेश में हुआ छात्र आंदोलन वास्तव में एक “विदेशी षड्यंत्र” था, जिसे अमेरिका ने योजना बनाकर और पाकिस्तान ने अंजाम देकर उन्हें सत्ता से हटाने के लिए रचा था.

हसीना ने कहा कि जो कुछ जुलाई-अगस्त 2024 में हुआ, वह कोई लोकतांत्रिक क्रांति नहीं बल्कि बांग्लादेश की स्थिरता पर किया गया एक “आतंकी हमला” था, जिसे छात्रों के विरोध प्रदर्शन का रूप देकर पेश किया गया.

“इसे क्रांति मत कहो, यह बांग्लादेश पर हमला था”

‘द प्रिंट’ से बातचीत में शेख हसीना ने कहा कि छात्र आंदोलन के नाम पर जो हिंसा भड़की, वह स्वाभाविक विरोध नहीं थी बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय अभियान था. उन्होंने कहा, “इसे क्रांति मत कहो. यह बांग्लादेश पर एक आतंकी हमला था. इस पूरे घटनाक्रम की योजना अमेरिका ने बनाई और उसे पाकिस्तान के जरिए लागू करवाया गया. छात्रों को आगे रखकर मुझे सत्ता से हटाने का प्रयास किया गया.”

पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जिन लोगों की मौत हुई, उनकी जिम्मेदारी पुलिस पर डाल दी गई, लेकिन “वास्तव में ये हत्याएं आतंकियों ने की थीं ताकि जनता को सरकार के खिलाफ भड़काया जा सके.”

मोहम्मद यूनुस पर साजिश रचने का आरोप

शेख हसीना ने अपने बयान में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को भी कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अमेरिका के इशारे पर उनके खिलाफ साजिश रची. उन्होंने कहा, “तुम जानते हो, इसके पीछे असली चेहरा कौन है? वो यूनुस है. अमेरिकन मुझसे सेंट मार्टिन द्वीप चाहते थे. अगर मैं मान जाती, तो वे मुझे सत्ता से नहीं हटाते. लेकिन मैंने अपना देश बेचने से इनकार कर दिया.”

हसीना के मुताबिक, अमेरिका बंगाल की खाड़ी में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण चाहता था. उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस ने इस मांग को पूरा न होने देने पर वाशिंगटन के साथ मिलकर सरकार गिराने की योजना बनाई. हसीना ने कहा, “यूनुस ने ही अमेरिकियों के कहने पर बांग्लादेश पर हुए हमले की साजिश, फंडिंग और क्रियान्वयन किया. वह एक धोखेबाज़ व्यक्ति है जिसने अपनी महत्वाकांक्षा के लिए अपने ही देश को संकट में डाल दिया.”

पाकिस्तान की भूमिका पर भी आरोप

शेख हसीना ने पाकिस्तान को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से बांग्लादेश में चरमपंथी नेटवर्क को समर्थन देती रही हैं. उन्होंने कहा, “यह कोई नई बात नहीं है. 1971 से ही पाकिस्तान बांग्लादेश के मामलों में हस्तक्षेप करता आया है. इस बार भी उन्हीं तत्वों ने विदेशी मदद से हिंसा को भड़काया. ” हसीना के अनुसार, “कट्टरपंथी संगठनों को फिर से सक्रिय कर” देश की स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश की गई.

अवामी लीग की मुश्किलें बढ़ीं

हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में सत्ता अंतरिम सरकार के हाथ में चली गई है, जिसका नेतृत्व अब मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं. इस सरकार ने हसीना की पार्टी अवामी लीग की सभी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है.

मई 2025 में बांग्लादेश चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण रद्द कर दिया, जिससे वह आगामी आम चुनाव में भाग नहीं ले सकेगी. कई वरिष्ठ अवामी लीग नेताओं को हिरासत में लिया गया है, जबकि शेख हसीना पर प्रदर्शनकारियों की मौतों से जुड़े मामलों में हत्या का आरोप लगाया गया है. ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-1 में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जहां अभियोजन पक्ष ने हसीना के लिए मौत की सजा की मांग की है.

चुनाव और सत्ता का भविष्य

बांग्लादेश चुनाव आयोग दिसंबर की शुरुआत में आम चुनाव की तारीखों की घोषणा करने वाला है. अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने घोषणा की है कि सेना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के साथ सहमति बनाकर फरवरी 2026 तक चुनाव कराए जाएंगे. हालांकि हसीना के समर्थकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था “लोकतंत्र की बहाली नहीं, बल्कि सत्ता कब्जाने की कवायद” है.

कैसे बढ़ा था छात्र आंदोलन

बांग्लादेश में 2024 के मध्य में शुरू हुआ छात्र आंदोलन शुरू में सरकारी नौकरियों में आरक्षण कोटे के खिलाफ था. जुलाई से अगस्त के बीच यह आंदोलन तेजी से हिंसक हो गया. रिपोर्टों के मुताबिक, 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों सरकारी इमारतें जलाकर खाक कर दी गईं.

स्थिति बिगड़ने के बाद सेना ने राजधानी ढाका और अन्य प्रमुख शहरों में नियंत्रण संभाल लिया. जब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे, तब सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने हसीना को देश छोड़ने की सलाह दी. 5 अगस्त को शेख हसीना को ढाका छोड़ना पड़ा और तब से वह कथित तौर पर भारत में सुरक्षित सरकारी आवास में रह रही हैं.

15 सालों तक सत्ता में रहीं हसीना

शेख हसीना ने लगभग 15 वर्ष तक लगातार बांग्लादेश की सत्ता संभाली, यह देश के इतिहास में सबसे लंबा निर्वाचित शासनकाल रहा. उनके कार्यकाल में बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति, बिजली उत्पादन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं, लेकिन राजनीतिक विपक्ष और मानवाधिकारों पर नियंत्रण को लेकर उन्हें आलोचना का भी सामना करना पड़ा.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिका और यूरोपीय संघ ने बांग्लादेश में हुई हिंसा और सत्ता परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की, लेकिन किसी सीधी हस्तक्षेप से इनकार किया. वहीं भारत ने अब तक “बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति पर कोई आधिकारिक टिप्पणी” नहीं की है, हालांकि कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार भारत स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करता है.

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