Nepal: ओली, प्रचंड और देउबा पर लटकी जांच की तलवार, देश छोड़ने पर रोक

Nepal Political Crisis: नेपाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. बांग्लादेश की घटनाओं की तरह अब काठमांडू में भी सत्ता, साख और समृद्धि की त्रिकोणीय लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है.

Nepal investigation hanging over Oli Prachanda and Deuba barred from leaving the country
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Nepal Political Crisis: नेपाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. बांग्लादेश की घटनाओं की तरह अब काठमांडू में भी सत्ता, साख और समृद्धि की त्रिकोणीय लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है. इस बार निशाने पर हैं नेपाल के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरे, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खडका.

इन सभी पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं. देश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने इन पर कार्रवाई की शुरुआत कर दी है, और ताजातरीन फैसले के तहत इन सभी नेताओं को काठमांडू छोड़ने से रोक दिया गया है.

क्यों बढ़ी जांच की रफ्तार?

इस कार्रवाई की चिंगारी तब भड़की जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर एक राजनेता के घर में बैंक नोट जलाए जाते हुए दिखाया गया. यह दृश्य जितना चौंकाने वाला था, उतना ही देश की जनता में नाराजगी पैदा करने वाला भी.

वीडियो के आधार पर नेपाल के मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग (DMLI) ने तत्काल इन नेताओं के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाया. अब तक इनके आवासों से जली हुई मुद्रा के अवशेष, राख और अन्य साक्ष्य जब्त किए जा चुके हैं और इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.

"राजनीतिक बदले की भावना"

शेर बहादुर देउबा के सचिवालय ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि ये सभी बातें झूठी और उद्देश्यपूर्ण हैं. वहीं प्रचंड और दीपक खडका की ओर से अब तक कोई सीधी टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन उनकी पूर्व गतिविधियों को लेकर आरोप जरूर तूल पकड़ रहे हैं.

प्रचंड पर माओवादी विद्रोह के दौरान बैंकों की लूट और सरकारी फंड के दुरुपयोग के आरोप हैं. दीपक खडका के खिलाफ जलविद्युत परियोजनाओं में घोटालों और ऊर्जा मंत्रालय में ठेकों के लेन-देन को लेकर उंगलियां उठ रही हैं.

अरजू राणा देउबा भी जांच के घेरे में

पूर्व विदेश मंत्री अरजू राणा देउबा, जो शेर बहादुर देउबा की पत्नी भी हैं, उन पर भी सार्वजनिक ठेकों में हस्तक्षेप, ट्रांसफर-पोस्टिंग में लेन-देन और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगे हैं. हालांकि, उनके खिलाफ अभी तक कोई औपचारिक जांच शुरू नहीं हुई है.

'दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा'

नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने दो टूक कहा है कि यह सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने या टालने की इच्छुक नहीं है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पारदर्शी होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी.

हालांकि जांच की धीमी रफ्तार को लेकर सवाल उठने लगे हैं. पूर्व पुलिस महानिरीक्षक सुरेंद्र बहादुर शाह ने चेतावनी दी है कि देरी से साक्ष्य मिट सकते हैं, और जांच निष्प्रभावी हो सकती है.

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