काठमांडू: नेपाल में हाल ही में हुए Gen-Z आंदोलन ने देश की राजनीति, सत्ता और सामाजिक ढांचे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है. राजधानी समेत कई शहरों में व्यापक हिंसा, आगजनी और विरोध प्रदर्शनों के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं. ऐसे समय में देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कार्यभार संभालते ही एक के बाद एक बड़े फैसले लेकर जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संकेत दिया है कि नेपाल स्थिरता की ओर लौटने की कोशिश कर रहा है.
मारे गए लोगों को मिलेगी शहीद की मान्यता
प्रधानमंत्री कार्की ने घोषणा की है कि Gen-Z आंदोलन के दौरान मारे गए 51 लोगों को "राष्ट्रीय शहीद" का दर्जा दिया जाएगा. यह फैसला न केवल मृतकों के परिवारों को सांत्वना देने वाला है, बल्कि यह एक मजबूत राजनीतिक संकेत भी है कि सरकार जनता की पीड़ा को गंभीरता से ले रही है.
हर मृतक के परिवार को 10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान भी किया गया है. मारे गए लोगों में एक भारतीय महिला भी शामिल थी, जिसकी मौत पर नेपाल और भारत दोनों में चिंता व्यक्त की गई थी.
6 महीने की अंतरिम सरकार, फिर चुनाव
प्रधानमंत्री बनने के बाद सुशीला कार्की ने स्पष्ट किया कि वे 6 महीने से अधिक सत्ता में नहीं रहेंगी और नव निर्वाचित संसद को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता सौंप देंगी. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा संसद भंग किए जाने के बाद उन्हें इस अंतरिम सरकार का दायित्व सौंपा गया है.
अब यह तय हो चुका है कि 5 मार्च 2026 को नेपाल में आम चुनाव कराए जाएंगे. इस बीच सरकार की प्राथमिकता संविधान के तहत स्थिरता, पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना होगी.
तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों को छोड़ना पड़ा घर
Gen-Z आंदोलन की आंच देश के सबसे वरिष्ठ राजनीतिक चेहरों तक पहुंची. 9 सितंबर को उग्र प्रदर्शनकारियों ने तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के घरों में आग लगा दी थी. इसके बाद ये नेता फिलहाल सेना के संरक्षण में सैन्य कैंपों में रह रहे हैं.
इनके समर्थक अब काठमांडू के बाहर सुरक्षित स्थानों या किराये के मकानों की तलाश कर रहे हैं. प्रचंड और ओली जैसे दिग्गज नेता फिलहाल पोखरा या अन्य शांत शहरों में शरण लेने की योजना बना रहे हैं, ताकि वे फिर से जन आक्रोश का सामना न करें.
नई सरकार में कौन-कौन होंगे मंत्री?
प्रधानमंत्री कार्की अपनी अंतरिम सरकार का मंत्रिमंडल गठित करने की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार में करीब 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनके चयन में पारदर्शिता और सार्वजनिक सहमति को प्राथमिकता दी जा रही है.
जिन प्रमुख नामों पर विचार हो रहा है, उनमें शामिल हैं:
इन नामों पर ऑनलाइन वोटिंग और जन भागीदारी के ज़रिए सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है. यदि सहमति बनती है, तो नया मंत्रिमंडल रविवार शाम या सोमवार तक शपथ ले सकता है.
Gen-Z: सत्ता से दूरी, पर नजर बनाए रखेंगे
Gen-Z आंदोलन के नेता पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे न तो सरकार में शामिल होंगे, न किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी लेंगे. हालांकि, उन्होंने कहा है कि वे अंतरिम सरकार के हर फैसले और क्रियाकलाप पर सक्रिय निगरानी बनाए रखेंगे.
उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि भविष्य की सरकार भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह हो. यही वजह है कि वे फिलहाल 'जनता की निगाह' की भूमिका में रहकर लोकतंत्र को मज़बूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं.
संसद भंग और विपक्ष का विरोध
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा संसद भंग किए जाने के फैसले का कम्युनिस्ट पार्टी (UML) ने कड़ा विरोध किया है. पार्टी महासचिव शंकर पोखरेल ने समर्थकों से सड़कों पर उतरने की अपील की है. विपक्ष का मानना है कि यह फैसला "राजनीतिक ताकतों को बाहर रखने की साजिश" हो सकता है.
कई क्षेत्रों से कर्फ्यू हटा लिया गया
लगातार छह दिनों तक चली हिंसा के बाद अब काठमांडू समेत कई क्षेत्रों से कर्फ्यू हटा लिया गया है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फिर से शुरू किया गया है, और भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही भी सामान्य हो चुकी है.
हालांकि, राजधानी के 6 संवेदनशील इलाकों में अभी भी कर्फ्यू जारी है. वहां पांच से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने, रैली, धरना, प्रदर्शन और सार्वजनिक सभाओं पर दो महीने तक के लिए प्रतिबंध लागू रहेगा.
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