Nepal Flood: नेपाल में आई भयानक बाढ़ को एक हफ्ते से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन कई परिवारों का दुख अभी खत्म नहीं हुआ है. जिन लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है, उनके परिवार भी अब उम्मीद छोड़ने लगे हैं. नुवाकोट में कुछ परिवारों ने अपने लापता परिजनों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया. नदी के किनारे चिताएं जलाई गईं, लेकिन उनमें शव नहीं थे. उनकी जगह अपनों की तस्वीर या कोई दूसरी प्रतीकात्मक वस्तु रखी गई. परिवारों ने भारी मन से अंतिम रस्में पूरी कीं, ताकि उन्हें भरोसा रहे कि उनके अपने लोगों की आत्मा को शांति मिल सके.
एबीसी न्यूज के मुताबिक, नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा हजारों लोग अभी भी लापता हैं. नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास बसे कई गांव बाढ़ की चपेट में आए थे. पानी का बहाव इतना तेज था कि कई घर और पूरी बस्तियां तक बह गईं.
नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 324 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. वहीं 39 देशों के 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. इसके अलावा नेपाल में 4,200 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है.
अपनों का इंतजार हुआ खत्म
नुवाकोट बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है. यहां कई परिवारों को कई दिनों बाद भी अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिली. ऐसे में लापता लोगों के परिवारों ने उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने का फैसला किया.
यह पल उनके लिए बेहद भावुक और दर्दनाक था. सामने चिता थी, लेकिन उस पर अपने किसी परिजन का शव नहीं था. इसके बावजूद परिवारों ने वही सभी रस्में निभाईं, जो किसी अपने की मौत के बाद की जाती हैं.
हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि अंतिम संस्कार से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है. इसी विश्वास के साथ परिवारों ने अपने लापता परिजनों के लिए यह अंतिम रस्म पूरी की.
त्रिशूली नदी के किनारे एक पुजारी ने लापता लोगों के प्रतीक के तौर पर कुछ वस्तुओं को चिता पर रखा. इसके बाद चिता जलाई गई. परिवार और रिश्तेदार पास खड़े रहे और पूजा-पाठ कर अपने लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं थी, बल्कि उन परिवारों की मजबूरी थी, जो कई दिनों से अपने अपनों की खबर का इंतजार कर रहे थे.
अस्पतालों में भी अपनों की तलाश
नेपाल में बरामद हुए कई शवों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है. अधिकारियों ने कुछ शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है. बताया गया कि कई शव खराब होने लगे थे और अस्पतालों तथा शवगृहों में भी जगह की कमी हो गई थी.
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, काठमांडू के एक अस्पताल में 100 से ज्यादा लोग खून के नमूने देने के लिए इंतजार कर रहे थे. उन्हें उम्मीद थी कि डीएनए जांच के जरिए उनके लापता परिजनों की पहचान हो सकेगी.
इन लोगों के हाथों में अपने परिवार के सदस्यों की तस्वीरें थीं. किसी के पास अपने भाई की तस्वीर थी तो कोई अपने बेटे की तस्वीर लेकर अस्पताल पहुंचा था. हर किसी की आंखों में एक ही उम्मीद थी कि शायद जांच से उनके अपनों के बारे में कोई जानकारी मिल जाए.
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