चांद पर कैसे बन गया 6 मंजिला इमारत जितना बड़ा गड्ढा? NASA वैज्ञानिक भी रह गए हैरान

चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिकों को एक ऐसा नया क्रेटर मिला है, जो अंतरिक्ष में होने वाली शक्तिशाली टक्करों की कहानी बयां करता है. NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) से मिली तस्वीरों में करीब 728 फीट (222 मीटर) चौड़ा और 141 फीट (43 मीटर) गहरा यह गड्ढा नजर आया.

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चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिकों को एक ऐसा नया क्रेटर मिला है, जो अंतरिक्ष में होने वाली शक्तिशाली टक्करों की कहानी बयां करता है. NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) से मिली तस्वीरों में करीब 728 फीट (222 मीटर) चौड़ा और 141 फीट (43 मीटर) गहरा यह गड्ढा नजर आया. वैज्ञानिकों ने इसका नाम चंद्रमा के अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक टॉम मैकगेचिन के सम्मान में 'मैकगेचिन' रखा है. खास बात यह है कि इसे सौर मंडल में अब तक खोजा गया सबसे बड़ा नया बना क्रेटर बताया जा रहा है.

एक चमकदार धब्बे ने खोला बड़ा राज

इस क्रेटर की खोज किसी खास मिशन के दौरान नहीं, बल्कि LRO के रूटीन डेटा-क्वालिटी चेक के दौरान हुई. NASA के वैज्ञानिक रॉबर्ट वैगनर चंद्रमा की सतह का विशाल नक्शा देख रहे थे, तभी उनकी नजर एक असामान्य रूप से चमकीले धब्बे पर पड़ी. इस चमकीले हिस्से के चारों ओर गहरे रंग का एक घेरा दिखाई दे रहा था. तस्वीर को करीब से देखने और पुराने डेटा से तुलना करने पर पता चला कि वहां की सतह में बड़ा बदलाव हुआ है.

2024 में हुई थी चांद से जबरदस्त टक्कर

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिस घटना से मैकगेचिन क्रेटर बना, वह 11 अप्रैल से 22 मई 2024 के बीच कभी हुई होगी. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चांद से किसी एस्टेरॉयड या धूमकेतु के टकराने से यह विशाल गड्ढा बना. टक्कर में शामिल अंतरिक्षीय पिंड का आकार करीब तीन से छह मंजिला इमारत जितना हो सकता है. क्रेटर का आकार लगभग दो अमेरिकन फुटबॉल मैदानों के बराबर बताया गया है.

सदी में एक बार होती है ऐसी घटना

चंद्रमा पर क्रेटर बनना कोई असामान्य घटना नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी टक्कर बेहद दुर्लभ मानी जाती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस स्तर की टक्कर चांद पर करीब एक सदी में एक बार या उससे भी कम समय में हो सकती है. चंद्रमा पर मैकगेचिन से कई गुना बड़े पुराने क्रेटर मौजूद हैं, लेकिन किसी नए क्रेटर के बनने के तुरंत बाद उसका अध्ययन करना वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर है.

चांद की जमीन और अंतरिक्षीय टक्करों को समझने में मदद

नए क्रेटर के अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी बड़े अंतरिक्षीय पिंड की टक्कर चंद्रमा की सतह को किस तरह बदलती है. LRO वर्ष 2009 से चंद्रमा की निगरानी कर रहा है और इसी लंबे डेटा रिकॉर्ड ने वैज्ञानिकों को नई और पुरानी तस्वीरों की तुलना करने का मौका दिया. 'साइंस एडवांसेज' में प्रकाशित शोध के जरिए इस घटना का विस्तृत अध्ययन सामने आया है.

भविष्य के मून मिशनों के लिए अहम खोज

मैकगेचिन क्रेटर की खोज सिर्फ चंद्रमा की जियोलॉजी समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के मानव मिशनों के लिए भी उपयोगी हो सकती है. चंद्रमा पर पृथ्वी जैसा वायुमंडल नहीं है, इसलिए अंतरिक्ष से आने वाले एस्टेरॉयड या अन्य मलबे को रोकने या धीमा करने वाली कोई वायुमंडलीय परत मौजूद नहीं है. ऐसे में सतह पर होने वाली टक्करों को समझना भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की मौजूदगी और मिशन की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

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