अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के जहाज के बीच हुई टक्कर ने 15 साल पुराने एक मामले की याद फिर ताजा कर दी है. जून 2011 में भी भारतीय नौसेना के INS गोदावरी और पाकिस्तान नौसेना के PNS बाबर के बीच ऐसी ही घटना हुई थी. दोनों घटनाओं में जहाजों की तेज गति और एक-दूसरे के बेहद करीब आकर किए गए असुरक्षित पैंतरों को लेकर विवाद सामने आया.
2011 में क्या हुआ था?
16 जून 2011 को अदन की खाड़ी में भारतीय युद्धपोत INS गोदावरी समुद्री डकैती के खिलाफ चल रहे एक अभियान में तैनात था. यह गोदावरी क्लास का प्रमुख युद्धपोत था, जिसे मुंबई के मझगांव डॉक में बनाया गया था और दिसंबर 1983 में नौसेना में शामिल किया गया था. उसी इलाके में पाकिस्तान का युद्धपोत PNS बाबर भी मौजूद था. वह MV Suez नाम के एक व्यापारिक जहाज को सुरक्षा दे रहा था. इस जहाज के चालक दल को सोमालिया के समुद्री लुटेरों के कब्जे से छुड़ाया गया था, जिसमें भारतीय नागरिक भी शामिल थे.
दोनों देशों ने लगाए थे अलग-अलग आरोप
उस समय भारतीय नौसेना के मुताबिक, PNS बाबर पीछे की तरफ से तेज गति से INS गोदावरी के करीब आया और ऐसा पैंतरा अपनाया जो समुद्री सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन था. पाकिस्तान के जहाज का हिस्सा भारतीय जहाज से टकरा गया, जिससे उसके हेलीकॉप्टर डेक पर लगी सुरक्षा जाली को नुकसान पहुंचा. बाद में एक वीडियो भी सामने आया, जिसे कथित तौर पर PNS बाबर पर मौजूद एक पाकिस्तानी नाविक ने बनाया था. इसमें दोनों जहाजों को एक-दूसरे से रगड़ते हुए देखा गया और वहां भारत विरोधी नारे भी सुनाई दिए. पाकिस्तान ने भारत के दावे को खारिज करते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई थी. उसका आरोप था कि INS गोदावरी ने बचाव अभियान में बाधा डाली और खुद खतरनाक तरीके से जहाज चलाया. भारत ने पाकिस्तान के इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया था.
1991 के समझौते का दिया गया था हवाला
2011 की घटना में भारत ने 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते के Article 10 का भी हवाला दिया था. इस प्रावधान के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच कम से कम तीन समुद्री मील की दूरी बनाए रखने की बात कही गई है. उस समय भारत ने पाकिस्तान के नौसेना सलाहकार को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया था. इस बार भी भारत ने राजनयिक माध्यम से पाकिस्तान के प्रभारी राजदूत स्तर के अधिकारी को तलब किया है. यानी करीब डेढ़ दशक बाद भी ऐसी घटनाओं पर विरोध दर्ज कराने का तरीका काफी हद तक वही बना हुआ है.
PNS हुनैन की घटना से फिर उठे सवाल
हालिया PNS हुनैन घटना में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न दिखाई देता है. भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तान नौसेना का जहाज नियमित निगरानी कर रहे एक भारतीय जहाज की ओर तेज गति से बढ़ा और असुरक्षित तथा गैर-पेशेवर तरीके से पैंतरा बदला. इसके बाद दोनों जहाजों के बीच संपर्क हुआ. भारतीय अधिकारियों ने यह भी कहा है कि पिछले छह महीनों में अरब सागर में इस तरह की नजदीकी पैंतरेबाजी की यह दूसरी घटना है.
चर्चा में पाकिस्तान नौसेना के पुराने हादसे
इन घटनाओं के साथ पाकिस्तान नौसेना के पुराने जहाजी हादसों का भी जिक्र किया जाता है. 2005 में कराची डॉकयार्ड में पाकिस्तान नौसेना के फ्लीट टैंकर PNS Moawin में आग लग गई थी. इस हादसे में छह नौसैनिकों की मौत हुई थी, जबकि करीब 90 लोग घायल हुए थे. उस समय पाकिस्तान नौसेना ने हादसे के पीछे मानवीय गलती और नियमित रखरखाव के दौरान तय सुरक्षा प्रक्रिया का पालन नहीं होने को जिम्मेदार बताया था.
15 साल बाद फिर वही सवाल
INS गोदावरी और PNS बाबर की 2011 की घटना और इस सप्ताह हुई PNS हुनैन से जुड़ी घटना के बीच करीब 15 साल का अंतर है, लेकिन दोनों मामलों में कुछ समानताएं नजर आती हैं. दोनों में भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज के तेज गति से करीब आने और असुरक्षित पैंतरेबाजी का आरोप लगाया है. दोनों मामलों में 1991 के समझौते का हवाला दिया गया और भारत ने राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया. फिलहाल पाकिस्तान की ओर से हालिया घटना पर सार्वजनिक रूप से कोई जवाब सामने नहीं आया है. अब यह देखना बाकी है कि पाकिस्तान की प्रतिक्रिया 2011 की तरह अलग दावे और जवाबी शिकायत के रूप में आती है या नहीं.
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