हमास के खिलाफ एकजुट हुए मुस्लिम देश! ट्रंप के गाजा प्लान पर इन इस्लामिक राष्ट्रों ने भरी हामी

Muslim countries On Gaza Peace Plan: मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है. गाजा पट्टी में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक 20 सूत्रीय शांति प्रस्ताव (Peace Plan) पेश किया है. इस प्रस्ताव के बाद सभी की नजरें मुस्लिम और अरब देशों के रुख पर थीं और अब उनका जवाब सामने आ चुका है.

Muslim countries unite against Hamas These Islamic nations support Trump Gaza plan
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Muslim countries On Gaza Peace Plan: मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में है. गाजा पट्टी में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक 20 सूत्रीय शांति प्रस्ताव (Peace Plan) पेश किया है. इस प्रस्ताव के बाद सभी की नजरें मुस्लिम और अरब देशों के रुख पर थीं और अब उनका जवाब सामने आ चुका है.

सऊदी अरब, कतर, यूएई, तुर्किए, मिस्र, पाकिस्तान, जॉर्डन और इंडोनेशिया जैसे आठ प्रमुख मुस्लिम और अरब देशों ने ट्रंप के इस प्रयास का स्वागत करते हुए संयुक्त बयान जारी किया है. उन्होंने इसे एक "ईमानदार और आशाजनक प्रयास" बताया है.

क्या है ट्रंप का प्रस्ताव?

डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्लान के जरिए गाजा में तुरंत युद्धविराम, सभी बंधकों की 72 घंटे में रिहाई, फिलिस्तीन को एक अलग राष्ट्र का दर्जा, और गाजा के पुनर्निर्माण जैसे कदमों की रूपरेखा पेश की है.

ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में हमास को चेतावनी दी है, "हमास के पास केवल 3 से 4 दिन हैं इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए. अगर वे तैयार नहीं होते, तो परिणाम बेहद दर्दनाक हो सकते हैं." उन्होंने आगे कहा कि इस प्रस्ताव पर इज़रायल समेत सभी मुस्लिम देश हस्ताक्षर कर चुके हैं, अब सिर्फ हमास की स्वीकृति बाकी है.

मुस्लिम देशों का समर्थन क्यों मायने रखता है?

इतिहास गवाह है कि गाजा मुद्दे पर मुस्लिम देशों का रुख हमेशा से निर्णायक रहा है. इस बार संयुक्त बयान में उन्होंने ट्रंप के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि गाजा के लोगों को उनकी बुनियादी ज़रूरतें मिलें, उन्हें बेघर न किया जाए, और फिलिस्तीनियों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिले. ट्रंप की योजना में इन सभी बातों को जगह दी गई है." ये भी साफ हुआ कि इन देशों ने ट्रंप के प्रस्ताव को सिर्फ एक राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि एक मानवीय पहल के तौर पर देखा है.

हमास की प्रतिक्रिया अब तक क्यों नहीं आई?

हमास की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि अलजज़ीरा के मुताबिक, कतर और मिस्र ने हमास को इस प्रस्ताव की पूरी जानकारी दे दी है और संगठन आंतरिक विचार-विमर्श कर रहा है. यदि हमास इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो यह गाजा में युद्ध खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है.

क्या ये देश इज़रायल के करीब हैं?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जिन देशों ने ट्रंप के पीस प्लान का समर्थन किया है, उनका अमेरिका से करीबी रिश्ता तो है ही, इज़रायल के साथ भी उनके कूटनीतिक संबंध सामान्य होते जा रहे हैं. हालांकि, कुछ देशों, जैसे सऊदी अरब और कतर, अब भी इज़रायल से सावधानीपूर्वक दूरी बनाए हुए हैं. यह संकेत करता है कि मुस्लिम देश शांति के पक्ष में एकजुट हो रहे हैं, चाहे उनके इज़रायल से मतभेद ही क्यों न हों.

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